Baba Sodal Mela 2026: आज से जालंधर में आस्था के महाकुंभ 'बाबा सोढल मेले' का शुभारंभ, पूरी होती हैं मन्नतें
punjabkesari.in Friday, Sep 25, 2026 - 08:03 AM (IST)
Jalandhar Sodal Mela: पंजाब के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक मेलों में शीर्ष स्थान रखने वाला बाबा सोढल मेला आज, 25 सितंबर 2026 से जालंधर शहर में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ आरंभ हो गया है। भादों मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (चौदस) को आयोजित होने वाले इस पावन मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु सिद्ध बाबा सोढल जी की महान आत्मा को नमन करने पहुंच रहे हैं।
मान्यता के अनुसार, जालंधर के चड्ढा परिवार में जन्मे बालक सोढल ने अपनी माता के मुख से निकले 'जा गर्क जा' शब्द का पालन करते हुए तालाब में छलांग लगा दी थी और तत्पश्चात पवित्र नाग देवता के रूप में प्रकट हुए थे। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु सोढल मंदिर स्थित ऐतिहासिक सोढल सरोवर के जल का छिड़काव करते हैं तथा उसे चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं।
मेले के दौरान चड्ढा व आनंद बिरादरी द्वारा मट्ठी (जिसे 'टोपा' कहा जाता है) का विशेष प्रसाद चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही, अपने प्रत्येक पुत्र के नाम पर सरोवर से 14 बार मिट्टी निकालने और घर में सुख-समृद्धि की प्रतीक 'खेत्री' बींजकर बाबा जी के श्रीचरणों में अर्पित करने की पारंपरिक प्रथा निभाई जाती है।
सिद्ध बाबा सोढल मेला पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोक-धर्म और सामाजिक ताने-बाने का एक अनुपम उदाहरण है। यह उत्सव तीन मुख्य स्तंभों कुलदेवी/कुलदेवता परंपरा, अटूट लोक-श्रद्धा, और सांस्कृतिक निरंतरता को एक सूत्र में पिरोता है। 'टोपा' प्रसाद के वितरण संबंधी कठोर नियम जहां बिरादरी की आनुवंशिक एवं गोत्र-पहचान को अक्षुण्ण रखते हैं, वहीं 14 बार मिट्टी निकालने और खेत्री अर्पण करने जैसे अनुष्ठान प्रकृति, तिथि-विज्ञान और संतति-कल्याण के गहरे संबंधों को व्यक्त करते हैं। भादों मास की शुक्ल चतुर्दशी को लाखों श्रद्धालुओं का यह समागम पंजाब से लेकर वैश्विक पंजाबी डायस्पोरा तक आस्था की उस अविरल धारा को प्रदर्शित करता है, जो पीढ़ियों से चली आ रही लोक-परंपराओं और सामाजिक-धार्मिक सद्भाव को जीवंत बनाए हुए है।
