मंदिर-गोशाला तोड़े जाने पर महापंचायत, प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में रोष
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 02:37 PM (IST)
गुड़गांव (नवोदय टाइम्स): सेक्टर-50 के आदमपुर झाड़सा गांव में बाबा बालकनाथ मंदिर, गोशाला और समाधि स्थल पर हुई तोड़फोड़ के विरोध में रविवार को मंदिर परिसर में महापंचायत हुई।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम और डीटीसीपी की संयुक्त कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। महापंचायत में 360 खाप के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान, तिजारा के विधायक महंत बालकनाथ, संत समाज और बड़ी संख्या में ग्रामीण व मौजिज लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने कार्रवाई को धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। ग्रामीणों और महंत बालकनाथ का दावा है कि बाबा बालकनाथ मंदिर और इससे जुड़ा परिसर करीब 100 से 150 वर्ष पुराना है।
उनके अनुसार, पंचायत ने पूजा-पाठ के लिए जमीन दान में दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 16 घंटे चली कार्रवाई के दौरान शिव मंदिर को छोड़कर पांच अन्य मंदिर, गोशाला और समाधि स्थल को तोड़ दिया गया। उनका यह भी आरोप है कि मंदिरों की मूर्तियां वहां से हटा दी गईं और गोशाला में मौजूद 35 गायों और बछड़ों को कार्टरपुरी गोशाला भेज दिया गया।
कार्रवाई के बाद मामले के विरोध में 11 सदस्यीय समिति गठित की गई। इसमें 360 गांवों के महेंद्र सिंह ठाकरान, वजीराबाद के पूर्व सरपंच सूबे सिंह बोहरा, प्रदीप जेलदार, संदीप ठाकरान, सुरेंद्र ठाकरान, भगत ठाकरान, सोनू ठाकरान और नवीन समेत अन्य लोग शामिल हैं। समिति सदस्यों ने मंदिर स्थल का दौरा कर तोड़फोड़ की निंदा की। इसके बाद तिजारा के विधायक महंत बाबा बालक नाथ भी मौके पर पहुंचे। महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि प्राचीन धार्मिक स्थल को तोड़ा जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर के ढांचे का पुनर्निर्माण कराने, ग्रामीणों के खिलाफ दी गई शिकायत वापस लेने और कार्टरपुरी गोशाला भेजी गई 35 गायों व बछड़ों को वापस लाने की मांग की। मांगों को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मुलाकात करेगा। ग्रामीणों ने कहा कि समाधान नहीं होने पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष मामला उठाया जाएगा। वहीं, प्रशासन का कहना है कि संबंधित स्थान पर करीब चार एकड़ सरकारी जमीन है। अधिकारियों के अनुसार, जमीन खाली कराने को लेकर पिछले दो महीने से नोटिस दिए जा रहे थे। नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई। अब महापंचायत के बाद ग्रामीणों और प्रशासन के बीच होने वाली बातचीत पर नजर है।
