125 करोड़ का शाही खजाना, कड़ा पहरा और 24 घंटे का मेला, ग्वालियर के गोपाल मंदिर में सजे दिव्य राधा-कृष्ण!

punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 01:42 PM (IST)

Gwalior Gopal Mandir Janmashtami: ग्वालियर का प्रसिद्ध सिंधिया रियासतकालीन गोपाल मंदिर जन्माष्टमी पर्व के लिए भव्य सजावट के साथ तैयार है। जन्माष्टमी के मौके पर यहां भगवान राधा-कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया गया है। सबसे खास बात यह है कि भगवान राधा-कृष्ण को सिंधिया रियासतकालीन करीब 125 करोड़ रुपये कीमत के हीरे-जवाहरात और सोने-चांदी के एंटिक आभूषण पहनाए गए हैं। इन बेशकीमती गहनों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पूरे साल जन्माष्टमी का इंतजार रहता है। सुरक्षा के बीच बैंक लॉकर से गहने मंदिर लाए गए और भगवान का श्रृंगार किया गया। जन्माष्टमी के अवसर पर गोपाल मंदिर 24 घंटे भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहता है।

ग्वालियर के फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर की स्थापना वर्ष 1921 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने करवाई थी। सिंधिया राजघराने ने भगवान राधा-कृष्ण की पूजा के लिए चांदी के बर्तन और भगवान के श्रृंगार के लिए रत्न जड़ित सोने के आभूषण तैयार करवाए थे। मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण की अद्भुत प्रतिमाएं विराजमान हैं।

वैसे तो सालभर गोपाल मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन जन्माष्टमी का पर्व यहां बेहद खास होता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान राधा-कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें करीब 125 करोड़ रुपये कीमत के हीरे, मोती, पन्ना और अन्य कीमती रत्नों से सुसज्जित आभूषण पहनाए जाते हैं। इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु ग्वालियर पहुंचते हैं।

भगवान राधा-कृष्ण को पहनाए जाने वाले ये एंटिक आभूषण सालभर बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखे जाते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन्हें बैंक से गोपाल मंदिर लाया जाता है। नगर निगम और पुलिस की सुरक्षा के बीच आधी रात भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद राधा-कृष्ण बेशकीमती आभूषणों से सजे दिव्य स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

जन्माष्टमी के मौके पर गोपाल मंदिर में 24 घंटे उत्सव का माहौल रहता है। मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने और राधा-कृष्ण के इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।

-अंकुर जैन ग्वालियर

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Niyati Bhandari

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