शास्त्रों में बताया गया है 5 दानों को महादान

2021-01-15T13:53:58.133

हिंदू धर्म में दान देने का बड़ा महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि दान देने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। और साथ ही इस लोक के बाद परलोक में भी कल्याण होता है। लेकिन आज के समय लोग दान का अर्थ केवल पैसे से ही समझते हैं। लोगों की नजरों में केवल पैसा ही रह गया है। लेकिन फिर भी दान कर्म को पुण्य कर्म में जोड़ा जाता है। हम आपको बताने जा रहे हैं इन पांच दानों के बारे में विस्तार से-
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भूमि दान
पहले के समय में राजाओं द्वारा योग्य और श्रेष्ठ लोगों को भूमि दान किया जाता था। भगवान विष्णु ने बटुक ब्राह्मण का अवतार लेकर तीन पग में ही तीनों लोक नाप लिए थे। यदि सही प्रकार से इस दान को किया जाए तो इसका बहुत महत्व होता है। वहीं अगर आश्रम, विद्यालय, भवन, धर्मशाला, प्याउ, गौशाला निर्माण आदि के लिए भूमि दान की जाए तो श्रेष्ठ रहता है।
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गोदान
सनातन संस्कृति में गौ दान को विशेष महत्व माना जाता है। इस दान के संबंध में कहा जाता है कि जो व्यक्ति गौदान करता है। इस लोक को बाद परलोक में भी उसका कल्याण होता है। दान करने वाले व्यक्ति और उसके पूर्वजों को जन्म मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त होती है।
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अन्न दान
अन्न दान करना बहुत ही पुण्य का कार्य होता है। यह एक ऐसा दान है, जिसके द्वारा व्यक्ति भूखे को तृप्त करता है। यह दान भोजन की महत्वता को दर्शाता है। सभी प्रकार की सात्विक खाद्य सामाग्रियां इसमें समाहित होती हैं।
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कन्या दान
कन्या दान को महादान कहा जाता है। सनातन धर्म में कन्या दान को सर्वोत्तम माना गया है। यह दान कन्या के माता-पिता द्वारा उसके विवाह संस्कार पर किया जाता है। इस दान में माता-पिता अपनी पुत्री का हाथ वर के हाथ में रखते हुए संकल्प लेते हैं। और उसकी समस्त जिम्मेदारियां वर को सौंप देते हैं।
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विद्या दान
इस दान से मनुष्य में विद्या, विनय औऱ विवेकशीलता के गुण आते हैं। जिससे समाज और विश्व का कल्याण होता है। भारतीय संस्कृति में सदियों से गुरु-शिष्य परंपरा में विद्या दान चला आ रहा है। दोस्तों, शास्त्रों में विद्या का दान सबसे श्रेष्ठ दान माना जाता है। क्योंकि यहीं एक ऐसा दान है जो बांटने से ओर अधिक बढ़ता ही है।


Content Writer

Lata

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