Gold-Silver Drop: जंग का माहौल, फिर भी क्यों औंधे मुंह गिर रहा सोना-चांदी? इन कारणों से हुआ सस्ता

punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 06:28 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः दुनिया में सामान्यत: युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक सोने-चांदी की ओर रुख करते हैं, क्योंकि इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है लेकिन इस बार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें गिरावट की ओर बढ़ रही हैं। फरवरी के अंत से 9 मार्च तक सोना लगभग 5-6 फीसदी और चांदी करीब 9 फीसदी तक टूट चुकी है।

बाजार का ट्रेंड इस बार उल्टा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 28 फरवरी को सोना करीब 5,416 डॉलर प्रति औंस पर था। आम उम्मीद थी कि युद्ध की खबर के साथ इसकी कीमतें बढ़ेंगी लेकिन 9 मार्च तक सोना 5,103 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। भारत में भी MCX पर सोना 1.67 लाख रुपए से गिरकर 1.60 लाख रुपए तक पहुंच गया, जबकि चांदी 2.89 लाख रुपए प्रति किलो से 2.63 लाख रुपए तक आ गई। 

आमतौर पर युद्ध या वैश्विक तनाव की स्थिति में निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं, जिससे इसकी कीमतें तेजी से बढ़ती हैं लेकिन इस बार बाजार का ट्रेंड उल्टा देखने को मिल रहा है।

क्यों गिर रहा सोना?

इस गिरावट के कई कारण हैं....

पहला, डॉलर की मजबूती ने सोने की कीमत पर दबाव डाला है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आती है और तेल का कारोबार डॉलर में होता है। मजबूत डॉलर सोने की मांग को सीमित करता है। 

दूसरा, पिछले महीनों में सोना और चांदी की कीमतें काफी बढ़ चुकी थीं, जिससे निवेशकों ने मुनाफा बुक किया।

तीसरा, अब निवेशकों के पास कई अन्य सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं, जैसे अमेरिकी सरकारी बॉन्ड, डॉलर और डिफेंस कंपनियों के शेयर। 

चौथा, हाल ही में शेयर बाजार में गिरावट आई है, और निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए सोना बेचा। 

पांचवां, उच्च ब्याज दरें भी सोने की मांग को कम कर रही हैं, क्योंकि बैंक और बॉन्ड बेहतर रिटर्न देते हैं।

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सोने में तेजी देखी गई थी लेकिन अब बाजार को लगता है कि मौजूदा संघर्ष शायद बड़े वैश्विक युद्ध में नहीं बदलेगा। यही कारण है कि घबराहट में खरीदारी नहीं हो रही।

आगे क्या हो सकता है

हालांकि अगर तनाव लंबा खिंचता है या हालात और बिगड़ते हैं, तो सोने और चांदी की कीमतें फिर तेजी पकड़ सकती हैं। फिलहाल निवेशकों का झुकाव डॉलर, बॉन्ड और तेल से जुड़े एसेट की तरफ अधिक है।


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Content Writer

jyoti choudhary

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