रुपए जहां भी गए उसी ने कहा ये मेरे हैं, पर उन्होंने कभी नहीं कहा कि हम तेरे हैं

Saturday, June 10, 2017 10:50 AM
रुपए जहां भी गए उसी ने कहा ये मेरे हैं, पर उन्होंने कभी नहीं कहा कि हम तेरे हैं

मुनि तरूण सागर जी के कड़वे प्रवचन


यादगार गिफ्ट
बच्चों से, ‘‘तुम्हारा जन्मदिन आए तो अपने पिता से गिफ्ट में सैलफोन नहीं मांगना, नई ड्रैस, ब्रेसलैट नहीं मांगना बल्कि जब तुम्हारे पिता कहें कि बेटा बोल तुझे जन्मदिन में क्या चाहिए? तो मौके का फायदा उठाकर अपने डैडी से कहना, ‘‘पिताजी! बस आज से आप सिगरेट पीना छोड़ दो, बस यही मेरा गिफ्ट होगा।’’ यह गिफ्ट तुम्हारे और तुम्हारे पिता के लिए यादगार बन जाएगा। 


रुपए बोले 
चार चोरों ने चार लाख रुपए चुराए। सोचा कुछ खा लें, फिर बांटेंगे। दो भोजन लेने गए और दो रखवाली  पर रहे। भोजन वालों ने सोचा भोजन में जहर मिला दें तो दोनों मर जाएंगे और हम दो-दो लाख बांट लेंगे। रखवाली वालों ने सोचा आते ही उन्हें गोली से उड़ा दें और हम दोनों दो-दो लाख बांट लेंगे। इधर जहर मिलाया और उधर गोली से उड़ाया। चारों मर गए। रुपए बोले, ‘‘हम जहां भी गए उसी ने कहा रुपए मेरे हैं, पर हमने कभी नहीं कहा कि हम तेरे हैं।’’


हंसो-हंसाओ 
हंसना पुण्य है। हंसाना परम पुण्य है। जब आप हंसते हैं तो ईश्वर के लिए प्रार्थना करते हैं,  मगर जब आप किसी रोते को हंसाते हैं तो ईश्वर आपके लिए प्रार्थना करता है। रोने में तो फिर भी आंसू लगते हैं, हंसने में तो वे भी नहीं लगते। फिर क्यों नहीं हंसते? हम हंसें, लेकिन हमारी हंसी मामा शकुनि की तरह कपटपूर्ण न हो, बल्कि शिशु और संत की तरह निश्छल/ निष्पाप हो। वैसे सही मायने में दो ही लोग हंसते हैं-एक तो पागल और दूसरा परम हंस। बाकी लोग या तो रोते हैं या फिर हंसने का ढोंग करते हैं।
 




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