खामेनेई तो मारा गया, लेकिन ट्रंप का कौन सा सपना अभी भी अधूरा है? जाने पूरा सच

punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 05:55 PM (IST)

नेशनल डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान ईरान के खिलाफ सख्त नीति अपनाई थी। हालिया संयुक्त अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई में ईरान के कई शीर्ष नेताओं के मारे जाने की खबर है, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे ईरान के सैन्य ढांचे और नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा।

हालांकि, इन घटनाओं के बावजूद अमेरिका का घोषित लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। ट्रंप ने शुरुआत में कहा था कि संघर्ष कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन हालात उम्मीद से ज्यादा जटिल साबित हुए। अब संकेत मिल रहे हैं कि यह टकराव लंबा चल सकता है।

ट्रंप की रणनीति क्या थी?

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का मकसद केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं था। उनका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना और उस पर आर्थिक दबाव इतना बढ़ाना था कि वह क्षेत्रीय स्तर पर 'प्रॉक्सी' गतिविधियों में शामिल न हो सके।

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अमेरिका का आरोप रहा है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी आशंका के चलते कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सख्ती अपनाई गई। जब इन प्रयासों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिला, तो सैन्य विकल्प पर जोर दिया गया।

नेतृत्व बदलने के बाद भी स्थिति जस की तस

रिपोर्टों के मुताबिक, शीर्ष नेतृत्व को नुकसान पहुंचने के बावजूद ईरान की सत्ता संरचना पूरी तरह नहीं बदली है। खामेनेई के समर्थक अब भी प्रभावी भूमिका में हैं और बड़े पैमाने पर शासन परिवर्तन के संकेत नहीं मिले हैं। ट्रंप को उम्मीद थी कि नेतृत्व में बदलाव के बाद ईरान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी और अमेरिका समर्थक नई व्यवस्था उभरेगी। लेकिन अब तक ऐसा स्पष्ट रूप से नहीं हुआ है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान ने हमलों के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने और सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की बात कही है और क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि संघर्ष जल्द खत्म होने की संभावना कम है।'

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अब आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय नीतियों पर अमेरिका के साथ किसी नए समझौते पर सहमत नहीं होता, तब तक तनाव कम होना मुश्किल है। दूसरी ओर, ईरान भी अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहा है।


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Content Editor

Mehak

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