SCO Summit में भारत-चीन के रिश्तों का "पुनर्जन्म", PM मोदी ने शी से कहा-अब 2.8 अरबों लोगों का होगा भला
punjabkesari.in Sunday, Aug 31, 2025 - 01:57 PM (IST)

Bejing: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान एवं संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि दोनों देशों के बीच सहयोग 2.8 अरब लोगों के कल्याण से जुड़ा है। मोदी ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा कि दोनों पक्षों द्वारा सीमा से सैनिकों को पीछे हटाए जाने से शांति और स्थिरता का माहौल बना। उत्तरी चीन के इस शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की शुल्क संबंधी नीति से पैदा हुई उथल पुथल की पृष्ठभूमि में हुई।
🇮🇳🇨🇳 - India & China cooperation benefits 2.8 billion people - Modi tells Xi Jinping
— IL Libanese (@Dal_Libano) August 31, 2025
'This will also pave the way for the welfare of the entire humanity.'
They forgot to thank Trump though… pic.twitter.com/jz08xMNDXN
मोदी ने कहा, ‘‘हमारा सहयोग दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हितों से जुड़ा है। इससे समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'' ऐसा समझा जाता है कि मोदी-शी वार्ता का मुख्य उद्देश्य उन द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना रहा जिनमें पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद गंभीर तनाव पैदा हो गया था। मोदी दो देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में शनिवार शाम जापान से यहां पहुंचे। यह मई 2020 में शुरू हुए पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद मोदी की चीन की पहली यात्रा है। मोदी ने अपने संबोधन में पिछले साल अक्टूबर में शी चिनफिंग के साथ हुई अपनी बैठक के बाद से दोनों पक्षों द्वारा शुरू किए गए कदमों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल कजान में हमारी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई जिसने हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा दी।'' मोदी ने कहा, ‘‘सीमा से सैनिकों की वापसी के बाद अब शांति और स्थिरता का माहौल है। हमारे विशेष प्रतिनिधि सीमा प्रबंधन पर भी एक समझौते पर पहुंच गए हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं।'' प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में चीन के राष्ट्रपति के साथ वार्ता की थी जो भारत एवं चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में गतिरोध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने के कुछ दिनों बाद हुई थी। भारत और चीन के बीच सीमा से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए 'सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों' का तंत्र है। प्रधानमंत्री ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की चीन द्वारा सफलतापूर्वक अध्यक्षता किए जाने पर शी को बधाई भी दी।
Stronger Ties For Shared Future!
— MyGovIndia (@mygovindia) August 31, 2025
While addressing the bilateral meeting with President Xi Jinping, PM @narendramodi said the interests of 2.8 billion people of both countries are linked to cooperation. This will pave the way for the welfare of humanity, with relations built on… pic.twitter.com/vOguWlpOTq
मोदी ने कहा, ‘‘मैं SCO की सफल अध्यक्षता के लिए चीन को बधाई देता हूं। हम चीन आने के निमंत्रण और आज की हमारी बैठक के लिए एक बार फिर हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।'' अभी इस बारे में जानकारी नहीं मिली है कि मोदी और शी के बीच बैठक में विशिष्ट रूप से क्या बातचीत हुई। तियानजिन की अपनी यात्रा से पहले मोदी ने कहा था कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। जापान के समाचार पत्र ‘द योमिउरी शिंबुन' के साथ एक साक्षात्कार में मोदी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मोदी ने शुक्रवार को प्रकाशित साक्षात्कार में कहा, “विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन का विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है।” मोदी की चीन यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के एक पखवाड़े से भी कम समय बाद हो रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ वांग की व्यापक वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने ‘‘स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी'' संबंधों के लिए कई कदम उठाए जाने की घोषणा की थी। इन कदमों में विवादित सीमा पर संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना, सीमा पर व्यापार को फिर से खोलना और सीधी उड़ान सेवाओं को जल्द से जल्द फिर से शुरू करना शामिल था।