Gold custom duty: अगर मान ली गईं ये 5 मांगें, तो सोने की कीमतें आ सकती हैं जमीन पर, Budget 2026 में सोने पर बड़ा ऐलान संभव

punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 04:34 PM (IST)

नेशनल डेस्क: इस साल का केंद्रीय बजट (2026-27) न केवल अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा, बल्कि आपकी शादी की खरीदारी और निवेश के सुनहरे सपनों को भी हकीकत बना सकता है। सोने की आसमान छूती कीमतों और सुस्त पड़ती मांग के बीच, देश का जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर उम्मीद भरी नजरों से वित्त मंत्री की ओर देख रहा है। अगर उद्योग जगत की मांगें मान ली गईं, तो इस बजट के बाद सोने के गहने खरीदना आपकी उम्मीद से कहीं अधिक सस्ता और आसान हो सकता है।

1.Import Duty में कटौती: कीमतों पर सीधा प्रहार

Jewelery industry की सबसे बड़ी उम्मीद इंपोर्ट ड्यूटी को कम करने पर टिकी है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना और चांदी विदेशों से मंगवाता है, इसलिए उन पर लगने वाला भारी टैक्स गहनों की अंतिम कीमत को बढ़ा देता है। जानकारों का मानना है कि कच्चे माल पर टैक्स घटने से न केवल घरेलू बाजार में कीमतें गिरेंगी, बल्कि भारतीय ज्वेलरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।

2. GST का बोझ होगा कम?

वर्तमान में ज्वेलरी पर 3% GST लागू है, जिसे घटाकर 1% से 1.25% के दायरे में लाने की वकालत की जा रही है। टैक्स का यह मामूली बदलाव ग्राहकों के लिए एक बड़ी बचत साबित हो सकता है। कम टैक्स का मतलब है कि मध्यम वर्ग, जो फिलहाल कीमतों के डर से खरीदारी टाल रहा है, फिर से शोरूम का रुख करेगा।

3. किश्तों पर सोना: EMI का नया ट्रेंड

बजट में एक क्रांतिकारी बदलाव की मांग यह भी है कि कम कीमत वाली ज्वेलरी के लिए रेगुलेटेड EMI (किश्त) की सुविधा शुरू की जाए। इससे आम आदमी को एकमुश्त मोटी रकम चुकाने की जरूरत नहीं होगी और वह पारदर्शिता के साथ अपनी पसंद के गहने खरीद सकेगा।

4. पुराने सोने को 'वर्किंग कैपिटल' बनाने की तैयारी

भारत के घरों में करीब 24,000 टन सोना जमा होने का अनुमान है। इंडस्ट्री चाहती है कि बजट में ऐसी नीतियां आएं जिससे लोग अपना पुराना या बेकार पड़ा सोना सिस्टम में ला सकें। गोल्ड रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलने से विदेशों से आयात करने की मजबूरी कम होगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

5. कागजी कार्रवाई से आजादी

कारोबारियों ने सरकार से कस्टम प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाने की अपील की है। लंबी जांच और जटिल कागजी कार्यवाही के कारण एक्सपोर्ट में होने वाली देरी को कम करने के लिए 'फास्ट क्लीयरेंस' सिस्टम की मांग की गई है, ताकि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का सपना सच हो सके।


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Content Editor

Anu Malhotra

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