अब ट्रंप के ''तीसरी दुनिया'' वाले नए पोस्ट से बवाल, क्या भारत पर कसा ''थर्ड वर्ल्ड'' का तंज ? जानें इस अपमानजनक शब्द का अर्थ
punjabkesari.in Tuesday, Jun 16, 2026 - 01:24 PM (IST)
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा "थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज़" शब्द के इस्तेमाल ने वैश्विक बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने एक बार फिर आव्रजन (इमिग्रेशन) के मुद्दे पर अपने सख्त रुख को दोहराते हुए ऐसा बयान दिया है, जिसने अमेरिका में नई राजनीतिक भूचाल आ गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, "यदि आप तीसरी दुनिया से लोगों को आयात करते हैं, तो आप स्वयं तीसरी दुनिया बन जाते हैं। यदि आप विकासशील देशों से बड़े पैमाने पर लोगों को लाते हैं, तो जल्द ही आपका देश भी तीसरी दुनिया जैसा बन जाएगा। अमेरिका को फिर से महान बनाओ।" यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में अवैध आव्रजन, सीमा सुरक्षा और शरणार्थी नीतियों को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है। इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर "थर्ड वर्ल्ड" शब्द का मतलब क्या है, क्या इसमें भारत जैसे देशों को भी शामिल किया जाता है, और क्यों आज दुनिया के कई विशेषज्ञ इस शब्द को अपमानजनक और पुराना मानते हैं।
Sadly, if you import people from Third World Countries, you quickly become a Third World Country — And there’s not a thing you can do about it. MAKE AMERICA GREAT AGAIN! President DONALD J. TRUMP
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) June 15, 2026
( TS: Jun 15 2026, 9:11 AM ET )… pic.twitter.com/PO1FMp18QL
'तीसरी दुनिया' से ट्रंप का क्या मतलब?
"तीसरी दुनिया" (Third World) शब्द मूल रूप से शीत युद्ध के दौर में उन देशों के लिए इस्तेमाल किया जाता था जो न तो अमेरिकी गुट में थे और न ही सोवियत गुट में। हालांकि आज आम बोलचाल में इसका उपयोग आर्थिक रूप से कम विकसित या विकासशील देशों के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शब्द शीत युद्ध के दौर का है और आज कई लोग इसे पुराना, भ्रामक और अपमानजनक मानते हैं। इसके स्थान पर "विकासशील देश" या "उभरती अर्थव्यवस्था" जैसे शब्दों को अधिक उपयुक्त माना जाता है। ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि उनका इशारा उन देशों से बड़े पैमाने पर होने वाले अवैध या अनियंत्रित आव्रजन की ओर था, जिससे सामाजिक सेवाओं, रोजगार और सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। वहीं आलोचकों का आरोप है कि इस तरह की भाषा विकासशील देशों और वहां से आने वाले प्रवासियों के प्रति नकारात्मक छवि पेश करती है तथा समाज में विभाजन को बढ़ावा देती है।
कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को दिया झटका
इसी बीच, अमेरिका के John McConnell ने ट्रंप प्रशासन की कुछ आव्रजन नीतियों को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि प्रशासन ने 39 देशों के नागरिकों के शरण, वर्क परमिट, ग्रीन कार्ड और नागरिकता संबंधी आवेदनों पर अनुचित रोक लगाई थी। अदालत के अनुसार, इन नीतियों ने अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व के कई देशों के आवेदकों को लंबे समय तक कानूनी अनिश्चितता में रखा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आवेदनों को रोकने का कारण आवेदकों की कोई गलती नहीं थी, बल्कि उनका जन्म किस देश में हुआ था। न्यायाधीश ने माना कि इस तरह की नीति वैधानिक अधिकार के बिना लागू की गई और इससे हजारों लोगों के अधिकार प्रभावित हुए। ट्रंप प्रशासन ने पहले सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए 39 देशों पर पूर्ण या आंशिक यात्रा प्रतिबंध लगाए थे। इनमें Afghanistan, Iran, Haiti, Somalia, Venezuela और Syria जैसे देश शामिल बताए गए।
🚨 JUST NOW: President Trump says it PERFECTLY
— Q RIGHT SCOPE (@Qrightscopee) June 15, 2026
"Sadly, if you import people from Third World Countries, you quickly become a Third World Country — And there’s not a thing you can do about it. MAKE AMERICA GREAT AGAIN!"
Import the 3rd world, become the 3rd world.
Europe must… pic.twitter.com/HXozEmyMbS
क्या है 'थर्ड वर्ल्ड' शब्द की कहानी?
"थर्ड वर्ल्ड" शब्द का जन्म 1950 के दशक में शीत युद्ध (Cold War) के दौरान हुआ था। उस समय दुनिया को तीन हिस्सों में बांटा जाता था। यह शब्द सबसे पहले फ्रांसीसी जनसांख्यिकीविद् Alfred Sauvy ने 1952 में इस्तेमाल किया था।
- फर्स्ट वर्ल्ड (First World): अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और उनके सहयोगी देश।
- सेकंड वर्ल्ड (Second World): सोवियत संघ, चीन और साम्यवादी गुट के देश।
- थर्ड वर्ल्ड (Third World): वे देश जो किसी भी गुट में शामिल नहीं थे, जिनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई नवस्वतंत्र देश शामिल थे।
क्यों माना जाता है विवादित?
समय के साथ "थर्ड वर्ल्ड" शब्द का अर्थ बदलने लगा। इसे गरीब, अविकसित या संसाधनों की कमी वाले देशों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वर्गीकरण अब पुराना हो चुका है क्योंकि शीत युद्ध समाप्त हो चुका है और दुनिया की आर्थिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही। कई विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि "थर्ड वर्ल्ड" शब्द देशों और लोगों के बीच श्रेष्ठता और हीनता की भावना पैदा करता है। अमेरिका की Georgetown University से जुड़ी विद्वान Ngozi Erondu के अनुसार, यह शब्द यह धारणा बनाता है कि तथाकथित "पहली दुनिया" के लोग अधिक विकसित और श्रेष्ठ हैं, जबकि अन्य देशों के लोग पिछड़े हैं।
भारत को कैसे देखा जाता है?
भारत को आमतौर पर एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था और निम्न-मध्यम आय वाला देश माना जाता है। लेकिन साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, अंतरिक्ष, डिजिटल भुगतान, तकनीक और स्टार्टअप क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना चुका है। इसी वजह से कई विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल एक शब्द से किसी देश की वास्तविक स्थिति को परिभाषित करना मुश्किल है। विशेषज्ञों का कहना है कि देशों को "पहली", "दूसरी" या "तीसरी" दुनिया में बांटने के बजाय उनकी वास्तविक चुनौतियों और उपलब्धियों के आधार पर समझना अधिक उचित है। इसलिए आज "थर्ड वर्ल्ड" शब्द को कई लोग ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में तो स्वीकार करते हैं, लेकिन वर्तमान समय में इसके इस्तेमाल को अक्सर संवेदनशील और विवादास्पद माना जाता है।
