ट्रंप ने ईरान पर क्यों रोके हमले, अमेरिका ने खुद ही खोल दिया असली शर्मनाक राज

punjabkesari.in Wednesday, Aug 05, 2026 - 12:56 PM (IST)

Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खुला है और तेजी से समझौता करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इसी बीच अमेरिकी सैन्य क्षमता को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने इस फैसले के पीछे एक और बड़ी चिंता को उजागर कर दिया है तेजी से घटता अमेरिकी हथियार भंडार। ताजा Reuters रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 से चल रहे पांच महीने लंबे ईरान युद्ध में अमेरिकी सेना ने अपने ATACMS और Precision Strike Missiles (PrSM) के वैश्विक भंडार का लगभग पूरा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है।

 

सूत्रों के अनुसार इन हथियारों का इस्तेमाल अब “virtually all” यानी लगभग पूरा हो चुका है। ये लंबी दूरी की मिसाइलें अमेरिकी सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके जरिए जमीन से दूर बैठे लक्ष्यों पर सटीक हमला किया जा सकता है। सिर्फ ATACMS और PrSM ही नहीं, बल्कि अमेरिकी नौसेना के Tomahawk क्रूज मिसाइलों का भी लगभग आधा वैश्विक भंडार इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। Reuters के अनुसार इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन एक सूत्र ने वैश्विक Tomahawk स्टॉक का करीब आधा इस्तेमाल होने की जानकारी दी। इसका मतलब यह है कि अगर अमेरिका दोबारा बड़े पैमाने पर ईरान पर हमला शुरू करता है तो उसे अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों की उपलब्धता को लेकर गंभीर रणनीतिक फैसले लेने पड़ सकते हैं।

 

अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम भी युद्ध के दबाव में हैं। Center for Strategic and International Studies (CSIS) के ताजा आकलन के मुताबिक फरवरी से जुलाई के बीच अमेरिका ने अपने Patriot interceptors का लगभग दो-तिहाई इस्तेमाल किया हो सकता है, जबकि THAAD interceptors का भंडार युद्ध की शुरुआत की तुलना में काफी कम हुआ है। Reuters ने बताया कि उसके सूत्रों ने इन आंकड़ों को अमेरिकी आंतरिक आकलनों के अनुरूप बताया। पहले के CSIS और CNN-आधारित आकलनों में भी THAAD और Patriot की भारी खपत सामने आई थी। अप्रैल के आकलन में कम से कम आधे THAAD और करीब आधे Patriot interceptors के इस्तेमाल का अनुमान था।CNN की रिपोर्टिंग के अनुसार ट्रंप ने शनिवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत की थी। खाड़ी देशों ने ईरानी जवाबी कार्रवाई और अपने ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को लेकर चिंता जताई थी।

 

CNN ने यह भी बताया कि अमेरिकी सैन्य क्षमता, मुनिशन की खपत और आगे बढ़ने के जोखिम पर सैन्य स्तर पर चर्चा हो रही थी। यानी तस्वीर में कूटनीति, Gulf allies की चिंता और सैन्य संसाधनों पर दबाव तीनों कारक दिखाई देते हैं। CNN की रिपोर्टिंग में सैन्य विशेषज्ञों ने इस सवाल पर भी चर्चा की कि क्या अमेरिका लगातार हमले जारी रखने की स्थिति में है। वहीं, बाद की रिपोर्टों में Joint Chiefs Chairman जनरल डैन केन की ओर से भी इस बात को लेकर चिंता सामने आई कि बड़े सैन्य अभियान से Central Command के उपलब्ध interceptors पर भारी दबाव पड़ सकता है।हालांकि, Pentagon का रुख अलग है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि सेना के पास राष्ट्रपति के आदेश पर अभियान चलाने के लिए जरूरी क्षमता मौजूद है। Reuters के मुताबिक Pentagon के प्रवक्ता ने भी अमेरिकी सेना की क्षमता पर जोर दिया है।

 


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Content Writer

Tanuja

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