भारत के स्वदेशी हथियारों में इजाफाः अब आसमानी दुश्मनों के लिए ‘सुदर्शन चक्र’ तैयार, एयर डिफेंस को मिलेगी नई ताकत
punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 01:33 PM (IST)
New Delhi: भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। देश में विकसित की जा रही Kusha लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली का पहला परीक्षण 23 जुलाई को किया गया। इसे भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। Kusha को भविष्य में भारत के बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच का अहम हिस्सा बनाया जा सकता है।
2035 तक ‘सुदर्शन चक्र’ का बड़ा हिस्सा
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार Kusha को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिशन सुदर्शन चक्र योजना के तहत विकसित किए जा रहे बहुस्तरीय राष्ट्रीय वायु रक्षा कवच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक ठिकानों को अलग-अलग तरह के हवाई हमलों से बचाने के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है। इसमें बैलिस्टिक मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से सुरक्षा शामिल होगी।
क्या है Kusha मिसाइल सिस्टम?
- Kusha एक स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।
- इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) विकसित कर रहा है।
- इसका उद्देश्य दुश्मन के लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों को दूर से ही पहचानकर उन्हें नष्ट करना है।
- Kusha सिस्टम में अलग-अलग क्षमता वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों को शामिल किया जाएगा।
- इनके लिए लगभग 150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर और 400 किलोमीटर तक की मारक क्षमता की योजना बताई जा रही है।
- 23 जुलाई को हुए परीक्षण में शुरुआती संस्करण की अधिकतम मारक क्षमता करीब 150 किलोमीटर बताई गई है।
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण
भारत के पास पहले से रूस की S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली मौजूद है। हालांकि, विदेशी हथियार प्रणालियों पर निर्भरता के साथ सप्लाई, रखरखाव और अपग्रेड जैसी चुनौतियां भी जुड़ी रहती हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण S-400 की कुछ डिलीवरी में देरी भी हुई है। ऐसे में भारत के लिए स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Kusha भविष्य में S-400 के साथ मिलकर भारत की वायु रक्षा की बाहरी परत को मजबूत कर सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वदेशी मिसाइल सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को इसके उत्पादन, रखरखाव और सॉफ्टवेयर पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। इससे किसी विदेशी देश पर हथियारों और स्पेयर पार्ट्स के लिए निर्भरता कम होगी। युद्ध जैसी स्थिति में हथियारों की सप्लाई बाधित होने का खतरा भी कम किया जा सकेगा। यानी Kusha सिर्फ एक मिसाइल सिस्टम नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
ड्रोन से लेकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान तक चुनौती
आज के युद्ध में खतरे तेजी से बदल रहे हैं। ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल, लंबी दूरी की मिसाइलें और आधुनिक लड़ाकू विमान एयर डिफेंस के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक प्रकार की मिसाइल प्रणाली से पूरे देश की सुरक्षा संभव नहीं है। इसके लिए अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर काम करने वाली कई परतों वाली एयर डिफेंस व्यवस्था जरूरी है। इसी व्यवस्था में लंबी दूरी की Kusha, मध्यम दूरी की प्रणालियां और कम दूरी की प्रणालियां एक-दूसरे को सपोर्ट कर सकती हैं।
Kusha को फिलहाल S-400 का सीधा विकल्प नहीं माना जा रहा है। बल्कि दोनों प्रणालियां मिलकर भारत की एयर डिफेंस क्षमता को मजबूत कर सकती हैं। जहां S-400 लंबी दूरी पर दुश्मन के हवाई खतरों से निपटने की क्षमता देता है, वहीं स्वदेशी Kusha भविष्य में भारत के बहुस्तरीय सुरक्षा नेटवर्क में एक और महत्वपूर्ण परत जोड़ सकती है।इसका फायदा यह होगा कि किसी एक सिस्टम पर पूरा दबाव नहीं पड़ेगा और अलग-अलग खतरों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर जवाब दिया जा सकेगा।
2028 से 2030 के बीच तैनाती की उम्मीद
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक Kusha सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से 2028 से 2030 के बीच शामिल किए जाने की योजना है। हालांकि, इसकी अंतिम क्षमता, तैनाती का स्वरूप और समयसीमा विकास और परीक्षण की प्रगति पर निर्भर करेगी। अगर यह कार्यक्रम तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में भारत की वायु रक्षा में स्वदेशी प्रणालियों की भूमिका काफी बढ़ सकती है।
Kusha से भारत को तीन बड़े फायदे
Kusha के सफल विकास से भारत को तीन बड़े फायदे हो सकते हैं-पहला, लंबी दूरी की स्वदेशी वायु रक्षा क्षमता; दूसरा, विदेशी हथियार प्रणालियों पर निर्भरता में कमी; और तीसरा, देश के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक ठिकानों के लिए ज्यादा मजबूत बहुस्तरीय सुरक्षा। यही वजह है कि Kusha का परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल का परीक्षण नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
