अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ बगावतः सिर्फ विपक्ष नहीं दर्जनों राज्यों में भी विद्रोह, जनता का भी बढ़ा आक्रोश
punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 11:51 AM (IST)
Washington:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक टकराव तेज हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने 60 व्यापारिक साझेदारों से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक नए आयात शुल्क लगाए हैं। अब 25 अमेरिकी राज्यों ने इन टैरिफ को अदालत में चुनौती देकर ट्रंप प्रशासन के सामने बड़ी कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है। इन राज्यों का आरोप है कि प्रशासन ने पुराने व्यापक टैरिफ को नए कानूनी रास्ते से दोबारा लागू करने की कोशिश की है। राज्यों ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि टैरिफ का बोझ आखिरकार कारोबारियों और आम अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
सिर्फ विपक्ष नहीं, राज्य भी आमने-सामने
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टैरिफ का विरोध केवल डेमोक्रेटिक नेताओं के राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है। 25 राज्यों का एक साथ अदालत पहुंचना ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति के खिलाफ बड़ा संस्थागत विरोध है। राज्यों का तर्क है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा से इतने व्यापक स्तर पर देशों पर आयात शुल्क लगाने का असीमित अधिकार नहीं है। उनका दावा है कि प्रशासन ने बंधुआ मजदूरी रोकने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा रही कानूनी प्रक्रिया को व्यापक टैरिफ लागू करने के लिए इस्तेमाल किया है।
अमेरिकी जनता में भी नाराजगी
अमेरिकी जनता के बीच भी ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर मतभेद गहरे हैं। Pew Research Center के जनवरी 2026 के सर्वे में 60 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ बढ़ाने को अस्वीकार किया, जबकि 37 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। करीब आधे अमेरिकियों ने कहा कि आने वाले वर्षों में टैरिफ का असर देश और उनके परिवारों के लिए नकारात्मक हो सकता है। अप्रैल 2026 के Pew सर्वे में भी 63 प्रतिशत अमेरिकियों ने ट्रंप के टैरिफ संबंधी फैसलों पर कम या बिल्कुल भरोसा नहीं होने की बात कही। इससे साफ है कि टैरिफ का मुद्दा अमेरिकी राजनीति में लगातार विवाद का कारण बना हुआ है। टैरिफ के खिलाफ अमेरिका में विरोध का इतिहास भी सामने आ चुका है। 2025 में ट्रंप के व्यापक आयात शुल्क लागू होने के समय देश के कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे।
ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नए टैरिफ का उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना है जो अपनी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर पर्याप्त रोक नहीं लगा रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, इस कार्रवाई के पीछे 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ बंधुआ मजदूरी से जुड़े व्यापारिक नियमों को लागू कराने की कोशिश है।लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह तर्क व्यापक टैरिफ लागू करने का बहाना बन सकता है। इसी वजह से अब मामला अदालत तक पहुंच गया है।
