Kailash Mansarovar Yatra 2026: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने निकाला कंप्यूटर ड्रा, 1000 श्रद्धालुओं का हुआ चयन

punjabkesari.in Thursday, May 21, 2026 - 06:11 PM (IST)

नेशनल डेस्क: शिव भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। विदेश मंत्रालय ने 'कैलाश मानसरोवर यात्रा (KMY) 2026' के लिए श्रद्धालुओं की चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक पारदर्शी और पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत 'ड्रॉ ऑफ लॉट्स' (Lucky Draw) के माध्यम से भाग्यशाली तीर्थयात्रियों का चुनाव किया। इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा जून महीने से शुरू होकर अगस्त 2026 तक चलेगी।

 20 बैचों में यात्रा करेंगे श्रद्धालु

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस साल की यात्रा के लिए कुल 1,000 श्रद्धालुओं को चुना गया है। चयन प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष, कंप्यूटर-जनरेटेड, रैंडम और लैंगिक समानता (महिला और पुरुष दोनों का संतुलित अनुपात) को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। चुने गए सभी श्रद्धालु 50-50 के कुल 20 बैचों में इस पावन यात्रा पर रवाना होंगे। यह यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) और सिक्किम के नाथू ला दर्रे (Nathu La Pass) के माध्यम से आयोजित की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब ये दोनों मार्ग पूरी तरह से वाहनों के चलने योग्य (Fully Motorable) हो चुके हैं, जिसके कारण इस बार श्रद्धालुओं को बहुत ही कम पैदल चढ़ाई (Trekking) करनी पड़ेगी।

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नेपाल के साथ सीमा विवाद पर भारत का रुख साफ

इस महीने की शुरुआत में नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा के संदर्भ में सीमा मुद्दे पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए भारत ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, "लिपुलेख दर्रा साल 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पारंपरिक और पुराना मार्ग रहा है। इस मार्ग से दशकों से यात्रा सुचारू रूप से चल रही है, इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है।"

कोरोना महामारी के बाद दोबारा लौटी रौनक

भगवान शिव का निवास स्थान होने के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र है। इसके साथ ही यह जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी गहरा धार्मिक महत्व रखती है। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के फैलने और उसके बाद चीनी पक्ष की ओर से यात्रा व्यवस्थाओं का नवीनीकरण न होने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था, जो पिछले साल (2025) दोबारा बहाल हुई और अब 2026 में यह बड़े स्तर पर आयोजित की जा रही है।

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दुर्गम परिस्थितियों में इन विभागों का मिलेगा सहयोग

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा अत्यधिक कठिन और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि श्रद्धालुओं को प्रतिकूल मौसम के बीच लगभग 19,500 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है।

इस यात्रा को सफल बनाने में उत्तराखंड, दिल्ली और सिक्किम की राज्य सरकारों के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का मुख्य सहयोग रहता है। इसके अलावा भारत की सीमा के भीतर कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) श्रद्धालुओं को रसद और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करते हैं।

 


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News Editor

Radhika

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