पेंशन की टेंशन खत्म! इन सरकारी स्कीम्स से हर महीने ₹1 लाख कमाने का मौका, जानें कैसे करें निवेश
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 05:27 PM (IST)
नेशनल डेस्क: रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर सीनियर सिटिजन्स ऐसी इनकम चाहते हैं जो नियमित और सुरक्षित हो। कई लोग ज्यादा रिटर्न के बजाय अपने पैसे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में सरकार की कुछ सेविंग स्कीम्स सीनियर सिटिजन्स के लिए अच्छा विकल्प बन सकती हैं। सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और भारतीय रिजर्व बैंक के फ्लोटिंग रेट बॉन्ड जैसी योजनाएं फिलहाल 8 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दे रही हैं।
हालांकि इन स्कीम्स से हर महीने लगभग ₹1 लाख की इनकम पाने के लिए काफी बड़ी रकम निवेश करनी पड़ सकती है। लेकिन जिन लोगों का मकसद सुरक्षित और स्थिर आय है, उनके लिए ये विकल्प शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से बेहतर माने जाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही निवेश रणनीति अपनाकर सीनियर सिटिजन्स केवल सरकारी योजनाओं के जरिए भी हर महीने अच्छी इनकम प्राप्त कर सकते हैं।
अलग-अलग सरकारी योजनाओं में निवेश से बन सकता है मजबूत पोर्टफोलियो
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर सीनियर सिटिजन लगभग ₹1.5 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाते हैं और इसे अलग-अलग सरकारी स्कीम्स में निवेश करते हैं, तो सालाना लगभग ₹12 लाख तक की इनकम मिल सकती है। इसका मतलब है कि हर महीने करीब ₹1 लाख की आय संभव है।
इस रणनीति के तहत सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम में लगभग ₹60 लाख निवेश करने पर करीब 8.2 प्रतिशत की दर से सालाना करीब ₹4.9 लाख की आय हो सकती है। वहीं पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम में ₹15 लाख का निवेश करीब 7.4 प्रतिशत की दर से सालाना लगभग ₹1.1 लाख की आय दे सकता है। इसके अलावा आरबीआई के फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड में करीब ₹75 लाख निवेश करने पर लगभग 8.05 प्रतिशत की दर से सालाना करीब ₹6 लाख तक की आय मिल सकती है। इस तरह कुल मिलाकर लगभग ₹12 लाख सालाना यानी करीब ₹1 लाख हर महीने की इनकम संभव हो सकती है।
विशेषज्ञों की निवेश रणनीति
वेल्थ मैनेजमेंट विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद निवेश करते समय केवल एक ही स्कीम पर निर्भर रहना सही नहीं होता। बेहतर यह है कि अलग-अलग सरकारी योजनाओं का मिश्रण तैयार किया जाए। सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम खास तौर पर रिटायर लोगों के लिए बनाई गई योजना है, जिसमें फिलहाल ₹30 लाख तक निवेश की अनुमति है और यह स्थिर आय प्रदान करती है। वहीं आरबीआई फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड का ब्याज हर छह महीने में बदल सकता है, इसलिए अगर भविष्य में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशकों को इसका फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा सरकारी सिक्योरिटीज यानी G-Secs में भी निवेश किया जा सकता है। इसमें निवेशक RBI के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं। इन बॉन्ड्स को अलग-अलग मैच्योरिटी में खरीदकर नियमित आय की व्यवस्था बनाई जा सकती है। कुछ निवेशक STRIPS जैसे विकल्पों का भी इस्तेमाल करते हैं। यह सरकारी बॉन्ड से जुड़ा एक तरीका है जिसमें ब्याज और मूलधन को अलग-अलग ट्रेड किया जाता है, जिससे भविष्य के कैश फ्लो को बेहतर तरीके से प्लान किया जा सकता है। नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS भी एक ऐसा विकल्प है जिसमें थोड़ी इक्विटी एक्सपोजर के साथ लंबी अवधि में 10 से 12 प्रतिशत तक का रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
घटती ब्याज दरें बन सकती हैं चुनौती
हालांकि केवल फिक्स्ड रिटर्न वाली सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने में भी कुछ जोखिम होते हैं। अगर भविष्य में ब्याज दरें कम होती हैं तो नई योजनाओं में मिलने वाला रिटर्न घट सकता है। ऐसे में लंबे समय तक हर महीने ₹1 लाख की आय बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
अन्य जोखिमों को भी समझना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही SCSS, MIS और PPF जैसी योजनाएं सरकार द्वारा समर्थित होती हैं, फिर भी निवेशकों को कुछ जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें रीइन्वेस्टमेंट रिस्क, ब्याज दरों में बदलाव और लंबे समय में बढ़ती महंगाई जैसे कारक शामिल हैं।
इससे बचने के लिए कई विशेषज्ञ “लैडरिंग स्ट्रैटेजी” अपनाने की सलाह देते हैं। इस रणनीति में पूरा पैसा एक ही जगह या एक ही समय में निवेश करने के बजाय अलग-अलग समय और अलग-अलग मैच्योरिटी वाली योजनाओं में निवेश किया जाता है। इससे निवेशक को नियमित आय मिलती रहती है और ब्याज दरों में बदलाव का असर भी कम पड़ता है।
सही योजना से मिल सकती है सुरक्षित इनकम
कुल मिलाकर देखा जाए तो अगर सीनियर सिटिजन्स सही तरीके से सरकारी स्कीम्स का संयोजन बनाते हैं, तो वे कम जोखिम के साथ नियमित और स्थिर आय प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
