BRICS में घुसने को बेताब पाकिस्तान; भारत की सहमति के बिना नहीं हो सकती एंट्री, 2023 से लगा रहा एड़ी-चोटी का जोर

punjabkesari.in Saturday, Sep 12, 2026 - 11:35 AM (IST)

Islamabad: आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ते कर्ज के दबाव से जूझ रहा पाकिस्तान अब BRICS के जरिए अपने लिए नए आर्थिक और कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है। इस्लामाबाद ने नवंबर 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक रूप से आवेदन किया था, लेकिन अब तक उसे समूह में जगह नहीं मिली है। पाकिस्तान के लिए मुश्किल सिर्फ सदस्यता की शर्तें नहीं, बल्कि भारत के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्ते भी हैं। BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शुरुआती प्रमुख सदस्य रहे हैं। बाद में समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात समेत कई नए देश इसमें शामिल हुए। समूह के विस्तार के साथ इसका आर्थिक और कूटनीतिक महत्व भी लगातार बढ़ा है।

 

क्यों BRICS के लिए मरा जा रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तान की BRICS में दिलचस्पी केवल कूटनीतिक पहचान हासिल करने तक सीमित नहीं है। उसकी सबसे बड़ी नजर आर्थिक फायदे पर है। लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और वित्त जुटाने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। इस्लामाबाद को उम्मीद है कि BRICS में शामिल होने से उसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा वह समूह से जुड़े वित्तीय संस्थानों के जरिए विकास परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के विकल्प भी बढ़ाना चाहता है। पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक उसकी आर्थिक वृद्धि दर 3.70 प्रतिशत रही है। ऐसे में इस्लामाबाद के लिए BRICS जैसा बड़ा आर्थिक मंच अतिरिक्त निवेश और व्यापार के अवसरों के लिहाज से आकर्षक है।

 

पाकिस्तान की दिलचस्पी BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक में भी है। निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इस बैंक में करीब 58 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। पाकिस्तान के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी पारंपरिक वित्तीय संस्थाओं पर अपनी निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहा है। BRICS के आर्थिक नेटवर्क से जुड़ने पर इस्लामाबाद को विकास परियोजनाओं, निवेश और वैकल्पिक वित्तीय सहयोग के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। BRICS के विस्तार के बाद समूह का वैश्विक आर्थिक वजन काफी बढ़ गया है। विस्तारित समूह में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और खरीद क्षमता समानता के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत बताई जाती है। भारत के लिए भी BRICS का महत्व लगातार बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक BRICS देशों को भारत का निर्यात 48.8 प्रतिशत बढ़कर 64.3 अरब डॉलर से 95.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यानी BRICS अब केवल राजनीतिक और कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि बड़े व्यापारिक अवसरों का केंद्र भी बन चुका है।

 

2023 में किया था औपचारिक आवेदन
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने नवंबर 2023 में BRICS में शामिल होने की इच्छा की पुष्टि की थी। तत्कालीन विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने BRICS को विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा था कि पाकिस्तान इसमें शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समावेशी बहुपक्षवाद को मजबूत करना चाहता है। इस्लामाबाद का दावा रहा है कि BRICS के ज्यादातर सदस्य देशों के साथ उसके अच्छे संबंध हैं। इसी आधार पर पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसकी सदस्यता के आवेदन पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जाएगा।

 

मुश्किल क्यों?
पाकिस्तान ने BRICS में प्रवेश के लिए रूस समेत कई सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की है। रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने भी कहा था कि इस्लामाबाद सदस्य देशों से संपर्क कर अपनी सदस्यता के लिए समर्थन मांग रहा है। लेकिन चीन और रूस जैसे देशों से समर्थन की कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान के लिए रास्ता आसान नहीं है। BRICS में नए सदस्यों को शामिल करने का फैसला मौजूदा सदस्य देशों की सहमति और समूह की तय प्रक्रिया के तहत होता है। इसलिए किसी एक प्रमुख सदस्य की असहमति भी पाकिस्तान की राह को कठिन बना सकती है।

 

भारत क्यों अहम?
यहीं पाकिस्तान की सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती सामने आती है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक, सीमा और सुरक्षा संबंधी तनाव रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की BRICS सदस्यता को केवल आर्थिक विस्तार के नजरिए से नहीं देखा जाएगा। भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और समूह के भीतर उसका महत्वपूर्ण प्रभाव है। इसलिए पाकिस्तान की सदस्यता के सवाल पर नई दिल्ली का रुख बेहद अहम होगा। खासकर भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के लिए भारतीय समर्थन हासिल करना आसान नहीं माना जाता। यानी इस्लामाबाद एक तरफ चीन और रूस जैसे देशों का समर्थन जुटाने में लगा है, दूसरी तरफ उसे यह भी देखना होगा कि BRICS के सबसे प्रभावशाली सदस्यों में शामिल भारत उसके आवेदन को किस नजर से देखता है।

 


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Content Writer

Tanuja

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