पाकिस्तान में अहमदिया नेता की गोली मारकर हत्या, ईदगाह के बाहर बनाया निशाना

punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 01:32 PM (IST)

Lahore: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अहमदिया समुदाय के 65 वर्षीय नेता सफदर महमूद की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना 2 सितंबर की शाम मंडी बहाउद्दीन जिले में ईदगाह मैदान के प्रवेश द्वार के पास हुई। अहमदिया समुदाय के मुताबिक, हमलावरों ने महमूद पर गोलियां चलाईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय की सुरक्षा और उनके खिलाफ कथित धार्मिक नफरत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सफदर महमूद के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं। उनका अंतिम संस्कार अहमदिया समुदाय के मुख्य केंद्र रबवाह में किया गया। परिवार ने आरोप लगाया है कि महमूद को उनकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया। पुलिस में दर्ज शिकायत में उनके बेटे कमरान सफदर ने कहा कि उनके पिता की किसी से दुश्मनी नहीं थी और हत्या का मकसद अहमदिया समुदाय में डर और धार्मिक नफरत फैलाना था। हालांकि, पुलिस ने अभी हत्या के पीछे धार्मिक कारण की पुष्टि नहीं की है। 

 

मंडी बहाउद्दीन के सिटी पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी अफजल अहमद ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। इसमें मृतक की हालिया दूसरी शादी और उनके कारोबारी मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल हत्या के पीछे धार्मिक मकसद को निश्चित रूप से स्थापित करना जल्दबाजी होगी।मंडी बहाउद्दीन जिले में अहमदिया समुदाय के खिलाफ हिंसा का यह पहला मामला नहीं है। जून 2024 में सदुल्लाहपुर इलाके में दो अहमदियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उस मामले में एक स्थानीय मदरसे का किशोर छात्र आरोपी था। पुलिस का दावा था कि वह एक मौलवी के भाषण से प्रभावित था और अहमदियों को 'काफिर' मानता था। उस मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और दोष साबित होने पर आरोपी को मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है।


 
अहमदिया समुदाय के प्रवक्ता आमिर महमूद ने कहा कि इस साल पाकिस्तान में किसी अहमदी की धार्मिक पहचान के आधार पर हत्या का यह पहला रिपोर्ट किया गया मामला है। 3 सितंबर को जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी बहाउद्दीन समेत पाकिस्तान के कई हिस्सों में अहमदियों के खिलाफ नफरत और उकसावे का अभियान जारी है। वहीं, पंजाब की अल्पसंख्यक सलाहकार परिषद के सदस्य सोहेल आलम ने हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच, हत्यारे की जल्द गिरफ्तारी और संवेदनशील इलाकों में खुफिया व्यवस्था मजबूत करने की अपील की।अहमदिया समुदाय की शुरुआत 19वीं सदी में ब्रिटिश भारत में हुई थी। समुदाय खुद को मुस्लिम मानता है, लेकिन पैगंबर मुहम्मद की अंतिम पैगंबरी को लेकर इसकी धार्मिक मान्यताएं मुख्यधारा के इस्लाम से अलग हैं। पाकिस्तान ने 1974 में अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित किया था। इसके बाद उनके लिए इस्लामी शब्दावली और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी कानूनी प्रतिबंध लगाए गए। 2023 की जनगणना के अनुसार पाकिस्तान में 1,62,684 अहमदी दर्ज किए गए थे। अहमदिया समुदाय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में धार्मिक कारणों से तीन अहमदियों की हत्या, पुलिस हिरासत में एक मौत और पांच हत्या के प्रयास दर्ज किए गए।  


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Content Writer

Tanuja

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