VIDEO: रूस में भारतीय छात्रों पर नस्लीय हमले बढ़े ! टार्चर के चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने, सवालों के घेरे में यूनिवर्सिटियां
punjabkesari.in Tuesday, Feb 10, 2026 - 11:45 AM (IST)
International Desk: रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के साथ शोषण, उत्पीड़न और हिंसा के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सात फरवरी को रूस की एक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में हुई चाकूबारी की घटना, जिसमें चार भारतीय छात्र घायल हो गए, ने एक बार फिर वहां पढ़ रहे छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस घटना के बीच विदेश मंत्रालय के आंकड़ों ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। साल 2025 में दुनियाभर के 196 देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने शोषण, नस्लीय भेदभाव और उत्पीड़न को लेकर करीब 350 शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें से 200 से अधिक शिकायतें अकेले रूस से जुड़ी थीं। यानी कुल मामलों का आधे से ज्यादा हिस्सा केवल एक देश से सामने आया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में इन शिकायतों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। साल 2023 में 68 शिकायतें दर्ज हुई थीं। 2024 में यह संख्या बढ़कर 78 हो गई। 2025 में शिकायतें तेजी से बढ़ते हुए 201 तक पहुंच गईं।
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— Dr Mohammad Momin Khan (@DrMohammadMomin) February 8, 2026
यूनिवर्सिटियों पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप
रूस में पढ़ने वाले अधिकांश भारतीय मेडिकल छात्र राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु से आते हैं। कम फीस, आसान प्रवेश प्रक्रिया और सीटों की उपलब्धता के चलते रूस लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए मेडिकल पढ़ाई का बड़ा केंद्र रहा है। लेकिन अब लगातार सामने आ रही शिकायतों ने इस भरोसे को कमजोर कर दिया है। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें दूसरे देशों के छात्रों की ओर से नस्लीय भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ता है। इसके अलावा, आरोप है कि कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन भी छात्रों को मानसिक रूप से परेशान करता है और छोटी-छोटी बातों पर कॉलेज से निकालने की धमकी दी जाती है। वीजा और पढ़ाई से जुड़े जोखिमों के डर से कई छात्र अपनी शिकायतें खुलकर दर्ज कराने से भी हिचकते हैं।
हॉस्टल में चाकू दिखाकर डराने का आरोप
मॉस्को की बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके एक भारतीय छात्र ने मीडिया को बताया कि हॉस्टल की रसोई में मामूली कहासुनी के बाद कुछ विदेशी छात्रों ने भारतीय छात्रों पर हमला कर दिया और चाकू दिखाकर डराया। छात्र के मुताबिक, इस घटना के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

नस्लीय भेदभाव बना आम समस्या
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स से जुड़े संगठनों का कहना है कि रूस में भारतीय छात्रों के साथ नस्लीय भेदभाव अब आम बात हो गई है। छात्रों के अनुसार, कई बार गाली-गलौज की जाती है और शिकायत करने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन से अपेक्षित मदद नहीं मिलती।छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि नियमों के अनुसार एक यूनिवर्सिटी में करीब 200 विदेशी छात्रों को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए, लेकिन कुछ संस्थान 1,200 से ज्यादा छात्रों को दाखिला दे देते हैं। बाद में इन्हीं छात्रों को, कई मामलों में छठे साल में भी पढ़ाई से बाहर कर दिया जाता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।
रूस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 50% घटी
इन हालात का असर अब साफ दिखने लगा है। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनोज कुमार के अनुसार, इन समस्याओं की वजह से रूस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में करीब 50% तक घट गई है।उन्होंने कहा कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर हुआ है। अब कई छात्र कजाखस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
भारत सरकार का जवाब
लोकसभा में इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विदेशों में भारतीय छात्रों और कामगारों की मदद के लिए भारतीय दूतावासों में विशेष अधिकारी तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दूतावास लगातार छात्रों के संपर्क में रहते हैं, उन्हें स्थानीय खतरों और चुनौतियों के बारे में जानकारी देते हैं और वरिष्ठ अधिकारी विदेशी यूनिवर्सिटियों में जाकर भारतीय छात्रों से सीधे संवाद भी करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो रूस में भारतीय छात्रों की स्थिति और खराब हो सकती है और यह भारत के सबसे बड़े विदेशी मेडिकल शिक्षा केंद्रों में से एक की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
