UNSC में अमेरिका को बड़ा झटका: ईरान के समर्थन में खुलकर आए रूस-चीन, होर्मुज को खोलने के प्रस्ताव पर किया वीटो
punjabkesari.in Tuesday, Apr 07, 2026 - 10:10 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज को दोबारा खोलने के लिए लाया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका। चीन और रूसa ने इस कमजोर किए गए (watered-down) प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया, जिससे यह उपाय फेल हो गया।
ट्रंप की डेडलाइन से पहले बड़ा घटनाक्रम
यह वोटिंग डोनाल्ड की तय समयसीमा से कुछ घंटे पहले हुई। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला, तो उसके नागरिक ढांचे पर हमले किए जा सकते हैं। मंगलवार सुबह उन्होंने और सख्त बयान देते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो “पूरी सभ्यता खत्म कर दी जाएगी।”
वोटिंग का गणित
- 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया
- Colombia और Pakistan ने मतदान से दूरी बनाई (abstain)
- चीन और रूस के वीटो के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो पाया
क्या कहता था प्रस्ताव?
प्रस्ताव में सदस्य देशों से कहा गया था कि वे आपसी समन्वय से रक्षात्मक कदम उठाएं और होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करें। साथ ही इसमें यह भी दोहराया गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत देश अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं।
युद्ध का असर और तेल संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ईरान ने इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से ब्लॉक कर रखा है। इससे वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई और तेल की कीमतों में तेजी आई। हालांकि चीन, रूस, भारतऔर पाकिस्तान जैसे “दोस्त” देशों के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
बहरीन का प्रस्ताव, लेकिन कमजोर पड़ा असर
यह प्रस्ताव बहरीन ने तैयार किया था, जो इस समय सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष भी है। इसमें Gulf Cooperation Council देशों और जॉर्डन का भी सहयोग था। लेकिन फ्रांस, चीन और रूस के विरोध के चलते प्रस्ताव को कई बार कमजोर किया गया। शुरुआती ड्राफ्ट में “हर जरूरी कदम” (जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल थी) उठाने की अनुमति थी और UN चार्टर के Chapter VII का जिक्र था, जो सख्त कार्रवाई की अनुमति देता है।
पहले भी आया था प्रस्ताव
पिछले महीने सुरक्षा परिषद ने बहरीन द्वारा लाए गए एक अन्य प्रस्ताव को 13-0 वोट से पास किया था, जिसमें ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई थी। हालांकि उस समय भी रूस और चीन ने मतदान से दूरी बनाई थी।
