Middle East Crisis : गैस, पेट्रोल और खाद पर बड़ा अपडेट… क्या घबराने की जरूरत है? सरकार ने बना ली पूरी रणनीति
punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 06:56 AM (IST)
नेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत ने ऊर्जा और कृषि सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य साफ है इस संकट का असर आम लोगों की रसोई और किसानों की खेती पर न पड़े। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, देश में एलपीजी, पेट्रोल-डीजल और खेती के लिए जरूरी खादों की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित बनी हुई है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों में गैस की कमी को लेकर फैली अफवाहों के कारण उपभोक्ताओं में घबराहट देखी गई। इसके चलते पैनिक बुकिंग का आंकड़ा अचानक 89 लाख प्रतिदिन तक पहुंच गया था। हालांकि, सरकार की सक्रियता और रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ने से अब हालात नियंत्रण में हैं और बुकिंग घटकर सामान्य स्तर 55 लाख प्रतिदिन पर आ गई है।
इस स्थिति से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी उत्पादन क्षमता में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिससे घरेलू बाजार में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी है।
PNG कनेक्शन पर फोकस
सरकार शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) कनेक्शन को तेजी से बढ़ावा दे रही है, ताकि गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम हो। इसी दिशा में मार्च महीने में ही साढ़े तीन लाख से अधिक नए PNG कनेक्शन जारी किए गए हैं।
किसानों के लिए राहत
कृषि क्षेत्र को लेकर भी सरकार पूरी तरह सतर्क है। सरकार का दावा है कि आने वाले खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि इस बार पहले की तुलना में कहीं ज्यादा उर्वरकों का भंडार जमा किया गया है।
उर्वरकों का मजबूत भंडार
- यूरिया का स्टॉक 62 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल से 10 लाख टन ज्यादा है
- डीएपी का स्टॉक 25 लाख टन है, जो लगभग दोगुना है
- एनपीके का भंडार 56 लाख टन के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीति
वैश्विक आपूर्ति को बनाए रखने के लिए भारत ने रूस, मोरक्को और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ रणनीतिक समझौते किए हैं। इन समझौतों के तहत खाद की खेप अब वैकल्पिक समुद्री मार्गों से सुरक्षित रूप से भारत पहुंच रही है।
कालाबाजारी पर सख्ती
सरकार ने देश के 652 जिलों में खाद की बिक्री पर कड़ी डिजिटल निगरानी शुरू की है, जिससे किसी भी तरह की संदिग्ध बिक्री या जमाखोरी को तुरंत पकड़ा जा सके। पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में कहीं भी तेल या गैस का ‘ड्राई-आउट’ नहीं हुआ है। अस्पतालों और होटलों जैसे जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति दी जा रही है।
