LPG Crisis : एक झटके में कारोबार हुआ ठप… 80% दुकानें बंद, महंगे सिलिंडर ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 05:55 PM (IST)

नेशनल डेस्क : नोएडा के सेक्टर-18 स्थित अट्टा मार्केट को आमतौर पर शहर के सबसे व्यस्त स्ट्रीट फूड हब में गिना जाता है। यहां सुबह से लेकर देर रात तक चाय, समोसा, नूडल्स और छोले-भटूरे की खुशबू के बीच लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। सड़क किनारे लगी रेहड़ियों पर ग्राहकों की कतारें आम दृश्य होती हैं। लेकिन इन दिनों इस इलाके की तस्वीर बिल्कुल बदली हुई नजर आ रही है। LPG सिलिंडर की कमी ने पूरे बाजार की रौनक फीकी कर दी है और वेंडर जोन में असामान्य सन्नाटा दिखाई दे रहा है।

गैस सप्लाई बाधित होने और ब्लैक मार्केट में सिलिंडर के दाम कई गुना बढ़ जाने से छोटे स्ट्रीट वेंडर्स के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिन लोगों की रोजी-रोटी इसी कारोबार पर निर्भर है, वे अब दुकान खोलने से पहले गैस के इंतजाम की चिंता में घिरे हुए हैं। कई रेहड़ियां बंद पड़ी हैं और जो कुछ खुले हैं, वे भी सीमित सामान के साथ काम चला रहे हैं।

गैस की कमी से 80% फूड स्टॉल बंद

सेक्टर-18 के वेंडिंग जोन में आमतौर पर 20 से अधिक फूड स्टॉल लगते हैं, लेकिन फिलहाल इनमें से करीब 80 प्रतिशत स्टॉल बंद पड़े हैं। समोसा, चाय और नूडल्स बेचने वाले एक विक्रेता ने बताया कि उनका गैस सिलिंडर सुबह ही खत्म हो गया और पिछले दो दिनों से नया सिलिंडर ढूंढने के बावजूद कहीं उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि जो थोड़ा बहुत तैयार सामान बचा है, उसे बेचकर वे आज का दिन खत्म कर देंगे और फिर दुकान बंद करनी पड़ेगी। वेंडर्स के मुताबिक बाजार में गैस सिलिंडर की सप्लाई लगभग ठप है और जो कुछ सिलिंडर मिल भी रहे हैं, वे बेहद महंगे दामों पर बेचे जा रहे हैं।

महंगे सिलिंडर ने बढ़ाई मुश्किलें

मेट्रो स्टेशन के पास छोटी सी जगह में चाय-नाश्ता बेचने वाले एक अन्य दुकानदार का कहना है कि पिछले तीन दिनों से वे गैस सिलिंडर खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनका कहना है कि जो सिलिंडर पहले करीब 1100 रुपये में मिल जाता था, अब उसके लिए 4 से 5 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं। इतनी ऊंची कीमत पर सिलिंडर खरीदकर कारोबार चलाना संभव नहीं है, क्योंकि ग्राहकों के लिए चाय की कीमत बढ़ाना भी आसान नहीं है। ऐसे हालात में कई वेंडर्स को मजबूरन दुकान बंद कर घर लौटना पड़ रहा है।

कोयले और अस्थायी इंतजाम से चल रहा काम

कुछ दुकानदारों ने गैस की कमी से निपटने के लिए कोयले या दूसरे अस्थायी साधनों का सहारा लिया है। छोले-भटूरे और राजमा-चावल बेचने वाले एक वेंडर ने बताया कि उनका गैस सिलिंडर खत्म हो चुका है, इसलिए फिलहाल वे घर से तैयार खाना लाकर कोयले की भट्टी पर गर्म करके बेच रहे हैं। हालांकि कोयले की कीमत भी अब बढ़ने लगी है। पहले जो कोयला 16 से 25 रुपये किलो में मिल जाता था, अब वही 30 से 40 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जिससे खर्च और बढ़ गया है।

कुछ दुकानों ने बदला तरीका

कुछ छोटे फास्ट फूड आउटलेट्स ने गैस की कमी के बीच वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की है। एक फास्ट फूड शॉप के कर्मचारी ने बताया कि दो दिन से गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी थी। बाद में उन्होंने इलेक्ट्रिक हीटर और इंडक्शन स्टोव का इंतजाम करके काम शुरू किया। हालांकि उनका कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही, तो या तो दुकान बंद करनी पड़ेगी या फिर खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।

बड़े आउटलेट्स पर नहीं पड़ा असर

दिलचस्प बात यह है कि अट्टा मार्केट के आसपास मौजूद बड़े फूड ब्रांड्स और रेस्टोरेंट्स पर इस संकट का ज्यादा असर नहीं पड़ा है। इन आउटलेट्स में PNG गैस कनेक्शन या इलेक्ट्रिक ओवन और डीप फ्रायर का इस्तेमाल होता है, इसलिए उनकी सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।

सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर खतरा

स्थानीय वेंडर्स के अनुसार अट्टा मार्केट इलाके में करीब दो हजार लोग रेहड़ियों और छोटे फूड स्टॉल्स के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं। इनमें से अधिकांश प्रवासी मजदूर हैं, जो अपने परिवारों का खर्च इसी काम से उठाते हैं। विक्रेताओं का कहना है कि अगर गैस सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डाल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गैस की उपलब्धता कब सामान्य होगी और बाजार की रौनक फिर कब लौटेगी।


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News Editor

Parveen Kumar

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