LPG गैस संकट से ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री पर बड़ा खतरा मंडराया, महाराष्ट्र की 2500 कंपनियों का उत्पादन ठप होने का डर
punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 06:11 PM (IST)
Auto Component Production: मुंबई समेत महाराष्ट्र के सबसे व्यस्त औद्योगिक क्षेत्रों से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां गैस की भारी किल्लत ने पूरी मैन्युफैक्चरिंग चेन की सांसें अटका दी हैं। चाकन, पिंपरी-चिंचवड़ और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली फैक्ट्रियों के पहिये थमने की कगार पर पहुंच गए हैं। इन इलाकों में काम करने वाले हजारों टियर-2 और टियर-3 सप्लायर, जो हमारी कारों, दोपहिया वाहनों और ट्रकों के लिए बेहद जरूरी पुर्जे तैयार करते हैं, इस समय अधर में लटके हुए हैं।
उद्योग संगठनों ने अब सीधे राज्य और केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाते हुए गुहार लगाई है कि गैस सप्लाई को तुरंत बहाल किया जाए, क्योंकि अगर यह अनिश्चितता बनी रही तो भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को एक बड़े उत्पादन संकट का सामना करना पड़ सकता है।
फैक्ट्रियों के भीतर का नजारा इस समय बेहद तनावपूर्ण है, क्योंकि कई इकाइयों के पास अब सिर्फ दो से चार दिनों का ही गैस स्टॉक बचा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि गैस कोई सामान्य ईंधन नहीं है जिसे अचानक बंद और शुरू किया जा सके; यदि सप्लाई रुकती है तो मशीनें ठप हो जाएंगी और उन्हें दोबारा चालू करने की प्रक्रिया में ही 24 से 48 घंटों की भारी बर्बादी होगी।
छत्रपति संभाजीनगर के चिकालठाणा, शेंद्र, वालुज और बिडकिन जैसे इलाकों में छोटे उद्योगों की हालत सबसे ज्यादा पतली है। यहां गियर, शाफ्ट और फोर्जिंग पार्ट्स जैसे महत्वपूर्ण पुर्जे बनते हैं, जिनके बिना बड़ी ऑटो कंपनियों की असेंबली लाइनें आगे नहीं बढ़ सकतीं।
इस संकट की तपिश केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्य गुजरात के साणंद इंडस्ट्रियल बेल्ट में भी खतरे का सायरन बज चुका है। साणंद के उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सप्लाई चेन में यह रुकावट जारी रही तो इसका 'डोमिनो इफेक्ट' पूरे देश के वाहन निर्माण पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब छोटे सप्लायर गैस की कमी से टूटते हैं, तो उसका अंतिम असर बड़ी कंपनियों के उत्पादन लक्ष्य और डिलीवरी पर पड़ता है।
गैस संकट की जद में 2500 से ज्यादा कंपनियां मुश्किल में
कुल मिलाकर, इस गैस संकट की जद में लगभग 2500 से ज्यादा कंपनियां आ चुकी हैं, जिनमें सिर्फ ऑटो ही नहीं बल्कि स्टील, इंजीनियरिंग, फार्मा और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। इन उद्योगों में बॉयलर और हीटर चलाने के लिए गैस अनिवार्य है और वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण कई जगहों पर उत्पादन में कटौती पहले ही शुरू हो चुकी है। यदि अगले कुछ दिनों में पाइपलाइनों के जरिए गैस का प्रवाह सामान्य नहीं हुआ, तो हजारों औद्योगिक यूनिट्स को अस्थायी रूप से ताला लगाने पर मजबूर होना पड़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।
