Ladli Bahna Scheme: मकर संक्रांति पर लाडली बहनों को बड़ी सौगात, खातों में आएंगे ₹3000
punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 08:55 AM (IST)
नेशनल डेस्क: मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार मकर संक्रांति के अवसर पर लाडली बहन योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के खातों में दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ डालने की तैयारी कर रही है। यह कुल राशि 3000 रुपये होगी। सरकार के इस फैसले पर अब कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं और चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है।
कांग्रेस की आपत्ति क्या है?
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में कहा है कि 15 जनवरी को महाराष्ट्र में मतदान होना है, और उससे ठीक पहले महिलाओं के खातों में इस तरह से पैसे ट्रांसफर करना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। कांग्रेस का आरोप है कि इस योजना से करीब 1 करोड़ महिलाएं लाभान्वित होंगी और इससे मतदाता सत्ताधारी दल के पक्ष में प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने इसे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और परोक्ष रूप से वोटरों को लुभाने का प्रयास बताया है। कांग्रेस ने साफ किया कि वह लाडली बहन योजना के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसकी मांग है कि किस्त की राशि मतदान के बाद लाभार्थियों के खातों में डाली जाए।
चुनाव आयोग ने मांगा सरकार से जवाब
कांग्रेस की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को सुबह 11 बजे तक सरकार का पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
BJP का कांग्रेस पर पलटवार
कांग्रेस के इस कदम पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस का विरोध महिला विरोधी सोच को दर्शाता है। बीजेपी का तर्क है कि यह योजना पहले से लागू है और इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।
चुनाव और त्योहार के बीच बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को है, जबकि 15 जनवरी को महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव होंगे और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले लाडली बहन योजना की राशि जारी किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
क्यों अहम है BMC चुनाव?
BMC चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, खासकर मुंबई में। बीएमसी देश की सबसे समृद्ध नगर निगमों में से एक है और जिस पार्टी के पास इसकी सत्ता होती है, उसका राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक ताकत काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल इस चुनाव को लेकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
