Gold-Silver: सोना-चांदी बेचने से पहले हो जाएं सावधान! जान लें टैक्स नियम नहीं तो हो सकता है भारी नुकसान
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 06:12 PM (IST)
नेशनल डेस्कः भारत में सोना और चांदी सदियों से भरोसे और सुरक्षा का प्रतीक रहे हैं। गहनों के साथ-साथ अब ये निवेश का भी अहम जरिया बन चुके हैं। लेकिन इन कीमती धातुओं को बेचते समय टैक्स से जुड़े नियमों की अनदेखी निवेशकों को भारी पड़ सकती है। सही समय और सही तरीके से बिक्री न करने पर मुनाफे का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। खास बात यह है कि कई मामलों में सिर्फ एक दिन का अंतर भी टैक्स देनदारी को कई गुना बढ़ा सकता है। ऐसे में सोना और चांदी में निवेश करने वालों के लिए टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी हो गया है।
होल्डिंग पीरियड से तय होता है टैक्स
सोना और चांदी पर लगने वाला टैक्स मुख्य रूप से होल्डिंग पीरियड पर आधारित होता है। फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड और सिल्वर को यदि 24 महीने से कम अवधि में बेचा जाता है, तो उस पर होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। ऐसे में मुनाफे पर टैक्स निवेशक की इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार लगाया जाता है। वहीं, 24 महीने से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है, जिसकी दर अपेक्षाकृत कम होती है। टैक्स बचाने में यही अंतर सबसे अहम भूमिका निभाता है।
ETF और म्यूचुअल फंड में अलग नियम
गोल्ड और सिल्वर ETF या म्यूचुअल फंड के मामले में होल्डिंग पीरियड केवल 12 महीने का होता है। यदि इन्हें 12 महीने से पहले बेचा जाता है, तो पूरा मुनाफा निवेशक की आय में जोड़ दिया जाता है और उसी के अनुसार टैक्स लगता है। 12 महीने से अधिक समय तक निवेश बनाए रखने पर फ्लैट टैक्स दर से टैक्स लगाया जाता है। इस अंतर को न समझ पाने के कारण कई निवेशक जल्दी रिडीम कर लेते हैं, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में दोहरा लाभ
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करने वालों को खास टैक्स लाभ मिलता है। इसमें निवेशकों को हर साल तय ब्याज मिलता है, जिस पर टैक्स देना होता है। इसके अलावा, 8 साल की परिपक्वता पर रिडेम्पशन करने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता। हालांकि, यदि बॉन्ड को तय अवधि से पहले बेचा जाता है, तो उस पर होल्डिंग पीरियड के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक बेहतर विकल्प माना जाता है।
बिक्री का समय बढ़ा सकता है टैक्स
अगर सोना या चांदी तय अवधि से एक दिन पहले भी बेच दी जाए, तो वह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन में आ सकती है। ऐसे में कम टैक्स की जगह ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, 2 लाख रुपये के मुनाफे पर टैक्स का अंतर कई हजार रुपये तक पहुंच सकता है। इसलिए सोना या चांदी बेचने की तारीख तय करते समय पूरी सावधानी बरतना जरूरी है। सही योजना और समय पर फैसला लेकर टैक्स में बड़ी बचत की जा सकती है।
