ईरान ने भारत का जताया आभार, कहा- UNHRC में साथ देने के लिए शुक्रिया..आपने न्याय का पक्ष लिया
punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 06:49 PM (IST)
International Desk: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में उसके खिलाफ लाए गए प्रस्ताव का विरोध करने पर भारत का औपचारिक रूप से आभार व्यक्त किया है। यह प्रस्ताव ईरान में कथित रूप से बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति को लेकर लाया गया था। UNHRC के 39वें विशेष सत्र में पेश इस प्रस्ताव को 25 देशों का समर्थन मिला, जबकि सात देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया और 14 देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी। भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल रहा, जिन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया। ईरान में भारत के राजदूत मोहम्मद फथाली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा-“मैं भारत सरकार का ईरान के पक्ष में principled और firm समर्थन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।
UNHRC में इस अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रस्ताव का विरोध भारत की न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव चयनात्मक, राजनीतिक दबाव बनाने वाला और कुछ शक्तिशाली देशों के एजेंडे से प्रेरित था। भारत ने मतदान के दौरान यह स्पष्ट संकेत दिया कि वह मानवाधिकारों के मुद्दे पर राजनीतिकरण और चयनात्मक हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं है। भारत पारंपरिक रूप से संप्रभु देशों के आंतरिक मामलों में बाहरी दबाव का विरोध करता रहा है।
भारत-ईरान के ऐतिहासिक रिश्ते
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत-ईरान संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध करीब 3,000 साल पुराने हैं, जो इस्लाम के उदय से भी पहले के हैं। उन्होंने बताया कि ईरान में भारतीय दर्शनशास्त्र, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान की पुस्तकों का अध्ययन विश्वविद्यालय स्तर तक किया जाता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता भारत के साथ सहयोग और मित्रता को हमेशा प्राथमिकता देते हैं और चाबहार परियोजना जैसे साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
ईरान में विरोध प्रदर्शन और विवाद
मानवाधिकार प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में ईरान में हुए हालिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान 3,117 लोगों की मौत हुई, जिनमें नागरिक और सुरक्षाकर्मी शामिल थे। वहीं, अमेरिका स्थित Human Rights Activists News Agency (HRANA) ने मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई है। इन आंकड़ों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस जारी है। ईरान में ये प्रदर्शन पहले आर्थिक मुद्दों महंगाई और मुद्रा संकट को लेकर शुरू हुए थे, जो बाद में व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए।
