अमेरिका-ईरान युद्ध की आहट तेज ! भारत, ब्रिटेन और चीन सहित कई देशों ने खाली कराए दूतावास, जारी की सख्त एडवाइजरी

punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 11:52 AM (IST)

International Desk: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने टेक्सास में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह चल रही बातचीत से “खुश नहीं” हैं और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि उन्होंने सैन्य हमले के सवाल पर स्पष्ट जवाब देने से इनकार किया। हाल ही में Geneva में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल निराश लौटा। ट्रंप के दूत Steve Witkoff और Jared Kushner ने वार्ता में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के संकेत दिए।

 

गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति
अब अगली तकनीकी बातचीत Vienna में प्रस्तावित है। दूसरी ओर, ओमान के विदेश मंत्री Badr Albusaidi ने शांति की संभावना जताई है। तनाव के बीच अमेरिका ने Jerusalem में अपने गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दी है। इससे पहले Beirut के लिए भी ऐसा आदेश जारी हुआ था।India, United Kingdom, China, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर ने भी नागरिकों को सतर्क रहने या क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। ब्रिटेन ने ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुलाने की घोषणा की है।

 

अमेरिकी सैन्य जमावड़ा और इजरायल पर असर
कूटनीतिक बातचीत जारी रहने के बावजूद अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford क्षेत्र में तैनात है और इजरायली जलक्षेत्र में मौजूद बताया जा रहा है। कई एयरलाइंस ने Tel Aviv के लिए उड़ानें निलंबित कर दी हैं। अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों को ओल्ड सिटी और वेस्ट बैंक जैसे क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी है। संभावित संघर्ष के डर से इजरायल की मुद्रा ‘शेकेल’ में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ऊर्जा बाजारों में भी हलचल है। कच्चे तेल की कीमतें 3.2% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। लाल सागर में सुरक्षा खतरों के कारण प्रमुख शिपिंग कंपनियां A.P. Moller-Maersk और Hapag-Lloyd ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया है। अब वे स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा रास्ता अपना रही हैं। स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर कूटनीति के दरवाजे खुले हैं, दूसरी ओर सैन्य तैयारी तेज हो रही है। यदि वार्ता विफल होती है तो यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा संकट में बदल सकता है।
 


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Content Writer

Tanuja

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