ईरान की भारत के खिलाफ खौफनाक साजिश ! होर्मुज में भारतीय नाविक क्यों निशाने पर? US विदेश मंत्री के बयान से बढ़ी हलचल
punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 12:26 PM (IST)
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अब भारत की चिंता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। क्या ईरान जानबूझकर भारतीय नाविकों को निशाना बना रहा है? क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की मौजूदगी वाले जहाजों पर हमले के पीछे कोई बड़ी रणनीति है? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान ने इन सवालों को हवा दे दी है। रुबियो ने आरोप लगाया है कि ईरान ऐसे व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनमें भारतीय नाविक सवार हैं। उनके इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर ईरान की इस कार्रवाई के पीछे क्या मकसद है और क्या भारत भी इस युद्ध की सीधी चपेट में आने वाला है? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आरोप लगाया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर रहा है। इन जहाजों में भारतीय नाविक भी सवार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जहाज उन देशों के लिए ऊर्जा संसाधन लेकर जा रहे थे, जो इस संकट के समाधान के लिए बातचीत में शामिल हैं। इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या पश्चिम एशिया का युद्ध अब भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
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रुबियो ने 31 अक्टूबर को अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि ईरान खुले तौर पर व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने की नीति अपना रहा है। उन्होंने तेल और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधन ले जाने वाले जहाजों का भी उल्लेख किया। अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक, इस तरह के हमले केवल किसी एक देश की समस्या नहीं हैं, बल्कि इनका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने या उन पर हमले होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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रुबियो ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों के हित में है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए सैन्य प्रयास कर रहा है। रुबियो ने ईरान पर केवल समुद्री हमलों को लेकर ही आरोप नहीं लगाए, बल्कि पश्चिम एशिया में उसकी भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती विद्रोहियों और इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र संगठनों का जिक्र किया। अमेरिकी विदेश मंत्री का आरोप है कि ईरान इन संगठनों को समर्थन देकर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा रहा है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता जताई और कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिकी प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। रुबियो के बयान का सबसे अहम पहलू भारतीय नाविकों की सुरक्षा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। होर्मुज में बढ़ता सैन्य तनाव सीधे उनकी जान को खतरे में डाल सकता है। इसके अलावा भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति और समुद्री व्यापार भी महत्वपूर्ण हैं। यदि इस मार्ग पर हमले जारी रहते हैं तो ऊर्जा की कीमतों से लेकर माल ढुलाई तक पर इसका असर पड़ सकता है।
