भारतीय युवक US वीजा के लिए 13 बार हुआ रिजेक्ट,14वें साक्षात्कार में अधिकारियों ने बजाई तालियां और....,दुनिया में हो रही चर्चा

punjabkesari.in Thursday, Oct 22, 2026 - 06:54 PM (IST)

New York: अमेरिका में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले भारतीय युवक प्रशांत की कहानी इन दिनों चर्चा में है। 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत ने एक प्रवासी भारतीयों के सामाजिक समूह में अपने वीजा साक्षात्कारों का अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, पहली बार मुंबई में हुए साक्षात्कार में उनसे अमेरिका में पढ़ाई करने की वजह और चुने गए पाठ्यक्रम के बारे में पूछा गया। इसके बाद हैदराबाद में भी उनका साक्षात्कार हुआ, लेकिन आवेदन फिर खारिज कर दिया गया। तीसरे साक्षात्कार तक दिल्ली में अधिकारियों ने उनके पिछले आवेदनों और लगातार मिल रही अस्वीकृति के बारे में सवाल पूछने शुरू कर दिए। प्रशांत का कहना था कि उन्हें कभी स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि उनका आवेदन क्यों खारिज किया गया।
 


प्रशांत ने मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई सहित अलग-अलग अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में साक्षात्कार दिए। हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में एक अधिकारी ने उनकी भविष्य की व्यावसायिक योजनाओं में रुचि दिखाई और उन्हें असाधारण प्रतिभा से जुड़ी वीजा श्रेणी पर विचार करने का सुझाव दिया।  दिल्ली में एक अधिकारी ने उनसे बुर्ज खलीफा जैसी ऊंची इमारत के निर्माण की योजना के बारे में पूछा। प्रशांत ने सवाल का जवाब दिया, लेकिन इसके बावजूद उनका वीजा मंजूर नहीं हुआ। एक अन्य साक्षात्कार में अधिकारी ने उनसे यह तक पूछा कि क्या वह अमेरिका में कोई अपराध करने की योजना से वहां जाना चाहते हैं। प्रशांत ने इससे इनकार किया और आवेदन करने का सिलसिला जारी रखा।

 

14वां साक्षात्कार रहा निर्णायक
प्रशांत के अनुसार, हैदराबाद में हुआ उनका 14वां साक्षात्कार पहले के अनुभवों से अलग था। अधिकारी ने उनके पिछले 13 अस्वीकृत आवेदनों की समीक्षा की और उनकी ईमानदारी तथा लगातार प्रयास करने के जज्बे की सराहना की। इसके बाद उनसे एक 20 मंजिला आवासीय इमारत के निर्माण की योजना समझाने को कहा गया। इमारत की प्रत्येक मंजिल पर पांच अपार्टमेंट होने थे। साक्षात्कार करीब 50 मिनट तक चला। प्रशांत ने बताया कि वह समय से पहले पहुंच गए थे और अपनी बारी के लिए कई घंटे इंतजार किया। जब अधिकारी ने उनका आवेदन मंजूर करने की बात कही, तब वह उस दिन साक्षात्कार देने वाले अंतिम उम्मीदवार थे। उनके अनुसार, वहां मौजूद कर्मचारियों सहित लोगों ने तालियां बजाकर खुशी जताई। उन्होंने इस दिन को अपना “स्वर्णिम दिन” बताया।

 

कहानी पर उठे सवाल  
प्रशांत की कहानी सामने आने के बाद कई लोगों ने उन्हें बधाई दी। हालांकि, कुछ लोगों ने इस बात पर संदेह जताया कि भारत में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों में साक्षात्कार के लिए सीमित उपलब्धता के बीच इतने अधिक अवसर हासिल करना व्यावहारिक रूप से कितना संभव था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत ने इन संदेहों का सीधे जवाब नहीं दिया। 
 


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Content Writer

Tanuja

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