Gold & Silver: 2026 में क्या फिर चमकेगा सोना? एक्सपर्ट ने बताया गोल्ड या सिल्वर में कौन देगा बेहतर रिटर्न

punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 07:53 PM (IST)

नेशनल डेस्कः पिछले साल 2025 में सोने ने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न देकर एक बार फिर खुद को सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश के रूप में साबित किया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी से गोल्ड की कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिला। अब 2026 की ओर बढ़ते हुए निवेशकों की नजर इस सवाल पर टिकी है कि क्या सोने की यह चमक आगे भी बरकरार रहेगी और आने वाले साल में गोल्ड किस दिशा में जाता नजर आएगा।

2026 में सोने की कीमतें

VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल ने मनीकंट्रोल हिंदी से बातचीत में बताया कि साल 2026 में सोने की कीमतें कई अहम कारकों पर निर्भर करेंगी। उनके अनुसार, सबसे बड़ा फैक्टर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की स्थिरता और जोखिम का स्तर होगा। उन्होंने कहा कि ब्याज दरें और महंगाई भी सोने की कीमतों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। अगर रियल ब्याज दरों में गिरावट आती है, तो सोना होल्ड करना सस्ता पड़ता है, जिससे इसकी मांग बढ़ सकती है।

इसके अलावा, करेंसी की वैल्यू में गिरावट का डर निवेशकों को गोल्ड की ओर आकर्षित करता है। ट्रेड वॉर, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता जैसे हालात भी सोने जैसे सेफ हेवन एसेट्स की डिमांड को बढ़ाते हैं। ये सभी फैक्टर्स मिलकर 2026 में सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

सोना या चांदी: 2026 में कौन देगा बेहतर रिटर्न?

बीते कुछ समय से सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 में सोना, चांदी की तुलना में ज्यादा स्थिर रिटर्न दे सकता है। अनिश्चित और मुश्किल हालात में सोना एक डिफेंसिव एसेट की तरह काम करता है। हालांकि, चांदी ने पिछले साल निवेशकों को बेहतर मुनाफा दिया, लेकिन इसकी तेजी के पीछे इंडस्ट्रियल डिमांड की बड़ी भूमिका रही है। आर्थिक मंदी या स्लो ग्रोथ के दौर में चांदी की कीमतों में गिरावट का जोखिम ज्यादा रहता है। ऐसे में अनिश्चित माहौल में सोना निवेशकों के लिए ज्यादा भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सोना इस समय दुनिया की सबसे मूल्यवान एसेट बन चुका है। अनुमान के मुताबिक, गोल्ड का कुल मार्केट कैप करीब 30.48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो इसकी वैश्विक मांग और निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। 


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Content Editor

Sahil Kumar

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