Why Gold-Silver Prices Crash: सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट 10% तक टूटा बाजार, जानिए गिरावट के पीछे की बड़ी वजहें

punjabkesari.in Thursday, Oct 23, 2025 - 02:38 PM (IST)

बिजनेस डेस्क: काफी समय से चले आ रहे ‘सेफ हेवन डिमांड’ यानी सुरक्षित निवेश की लहर के बाद अब सोना और चांदी दोनों की चमक फीकी पड़ने लगी है। वैश्विक तनाव कम होते ही निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी है, जिससे दोनों कीमती धातुओं के दामों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। इस महीने की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोना-चांदी अब लगभग 10% तक टूट गए हैं।

रिकॉर्ड से नीचे लुढ़का सोना-चांदी
पिछले हफ्ते सोना $4,381 प्रति औंस तक पहुंच गया था, जबकि चांदी $54.5 प्रति औंस के स्तर पर थी। लेकिन अब दोनों धातुएं फिसलकर नीचे आ गई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट कई वैश्विक कारणों से जुड़ी है -
-भू-राजनीतिक तनावों में कमी,
-अमेरिकी डॉलर की मजबूती, और
-अमेरिका द्वारा व्यापार समझौतों पर प्रगति के संकेत।
इन वजहों से निवेशक अब जोखिम भरे निवेश जैसे शेयर बाजार की ओर लौटने लगे हैं, जिससे कीमती धातुओं से पैसा निकल रहा है।

प्रॉफिट बुकिंग और बदलते संकेतों का असर
एस.एस. वेल्थस्ट्रीट की संस्थापक सुगंधा सचदेवा के मुताबिक, मौजूदा गिरावट पूरी तरह से प्रॉफिट बुकिंग और बाजार के बदलते संकेतों की वजह से है। उन्होंने कहा, “निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफा निकाल रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक बातचीत में प्रगति और अमेरिकी सरकार के शटडाउन पर राहत के संकेतों ने सोने की सेफ-हेवन अपील को कमजोर किया है। डॉलर के मजबूत होने से भी मांग घटी है।” सचदेवा के अनुसार, सोने के दाम लगभग $43.80 प्रति औंस से गिरकर 10% नीचे आए हैं, जबकि चांदी में भी इसी तरह की गिरावट दर्ज की गई है।

कहां मिलेगा सोने-चांदी को सपोर्ट?
उन्होंने बताया कि सोने के लिए प्रमुख सपोर्ट $39.50–$40.00 प्रति औंस (लगभग ₹2,10,000 प्रति 10 ग्राम) के बीच है। जब तक यह स्तर बरकरार रहता है, तब तक कीमतों में धीमी रिकवरी संभव है। उन्होंने अनुमान जताया कि कीमतें ₹1,25,000–₹1,27,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं, उसके बाद बाजार में स्थिरता रहेगी। चांदी के लिए सपोर्ट स्तर लगभग ₹1,45,000 पर है, जबकि ऊपरी सीमा ₹1,67,000 तक सीमित रह सकती है।

डॉलर मजबूत, निवेशकों की निगाह फेडरल रिजर्व पर
अमेरिकी डॉलर में तेजी के चलते गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव और गिरे। स्पॉट गोल्ड 0.3% घटकर $4,082.95 प्रति औंस पर पहुंचा, जबकि दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स 0.8% की बढ़त के साथ $4,097.40 पर रहे। डॉलर इंडेक्स में 0.1% की तेजी दर्ज की गई, जिससे अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो गया। अब सभी की निगाहें अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले पर हैं, जो सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।

भारतीय बाजार में भी दिखा असर
घरेलू बाजार में भी सोना-चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई से तेज गिरावट दर्ज की है। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री का कहना है कि अमेरिकी–भारत व्यापार संबंधों में सुधार और निवेशकों के जोखिम भरे एसेट्स में लौटने से कीमती धातुओं पर दबाव आया है। उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों की तेज गिरावट के बाद सोना $4,050 और चांदी $48 प्रति औंस के आसपास स्थिर हुई है। यह गिरावट बाजार की सकारात्मक भावनाओं और ट्रेड समझौतों में प्रगति को दर्शाती है।”

तकनीकी स्तर और संभावनाएं
कलंत्री के अनुसार:

गोल्ड सपोर्ट: $4,020–$3,975

गोल्ड रेजिस्टेंस: $4,125–$4,170

सिल्वर सपोर्ट: $47.85–$47.40

सिल्वर रेजिस्टेंस: $48.75–$49.30

रुपये में देखें तो—

सोना सपोर्ट: ₹1,21,070–₹1,20,580

रेजिस्टेंस: ₹1,22,350–₹1,23,000

चांदी सपोर्ट: ₹1,44,350–₹1,43,450

रेजिस्टेंस: ₹1,46,850–₹1,47,780

क्या खत्म हो गया Gold रैली का दौर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट रैली का अंत नहीं, बल्कि तेज उछाल के बाद की स्वाभाविक सुधार प्रक्रिया है। पिछले एक साल में सोना 65% तक उछला, जो भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक मंदी और केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी से प्रेरित था। अब जब हालात थोड़ा सामान्य हो रहे हैं और निवेशक इक्विटी बाजारों की ओर लौट रहे हैं, सोने की सेफ-हेवन डिमांड कम हुई है। लेकिन दीर्घकाल में अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो फिर से सोने में मजबूती लौट सकती है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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