आपकी ''डेस्क जॉब'' बढ़ा रही है कैंसर का खतरा, डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी; इन 5 लक्षणों को न करें नजरअंदाज

punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 01:43 PM (IST)

Colon Cancer Risk: डेस्क जॉब और घंटों कुर्सी पर बैठे रहने वाली 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) के खतरे को 24% तक बढ़ा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, शारीरिक गतिहीनता से मेटाबॉलिज्म सुस्त होता है और आंतों में हानिकारक तत्व लंबे समय तक जमा रहते हैं। इससे बचने के लिए डॉक्टरों ने हर घंटे 'मूवमेंट ब्रेक' लेने, फाइबर युक्त आहार और नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह दी है।

आधुनिक जीवनशैली में 'सिटिंग' (बैठना) को अब 'नया स्मोकिंग' कहा जाने लगा है। अगर आप भी उन करोड़ों लोगों में शामिल हैं जो दिन के 8 से 9 घंटे कंप्यूटर स्क्रीन के सामने चिपक कर बिताते हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। हालिया चिकित्सा शोधों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बैठे रहने वाली 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' न केवल मोटापे का कारण है, बल्कि यह कोलन कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर) जैसे घातक रोग के जोखिम को 24% तक बढ़ा रही है। 

कुर्सी से कैंसर का कनेक्शन: विशेषज्ञ की राय 

कैंसर विशेषज्ञ के अनुसार, लगातार बैठने से शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया सुस्त पड़ जाती है। जब शारीरिक गतिविधियां कम होती हैं, तो पाचन तंत्र की गति (Gut Motility) भी धीमी हो जाती है। जब आंतों की गति धीमी होती है, तो भोजन के साथ आए हानिकारक टॉक्सिन्स और अपशिष्ट पदार्थ आंतों की दीवारों के संपर्क में लंबे समय तक रहते हैं। यही स्थिति असामान्य कोशिकाओं के पनपने का आधार बनती है, जो आगे चलकर कैंसर ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। 

कोलन कैंसर: चुपचाप पनपता खतरा 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया का तीसरा सबसे आम कैंसर है। इसकी शुरुआत अक्सर छोटी गांठों से होती है, जिन्हें 'पॉलिप्स' कहा जाता है। यदि समय रहते इनकी पहचान न हो, तो ये जानलेवा साबित हो सकते हैं। 

इन 5 लक्षणों को न करें नजरअंदाज: 

  • मल त्याग की आदतों में अचानक और स्थायी बदलाव। 
  • मल में खून का आना। 
  • बिना किसी ठोस कारण के तेजी से वजन घटना। 
  • शरीर में लगातार बनी रहने वाली थकान या कमजोरी। 
  • पेट में मरोड़, दर्द या भारीपन का अहसास। 

बचाव के मंत्र: सिटिंग जॉब में भी रहें फिट 

डॉक्टरों का मानना है कि जिम जाना अच्छी बात है, लेकिन दिनभर की निष्क्रियता की भरपाई केवल एक घंटे के व्यायाम से नहीं हो सकती। इसके लिए आदतों में बदलाव जरूरी है: 

'मूवमेंट ब्रेक' लें: हर 45-60 मिनट में अपनी कुर्सी छोड़ें और कम से कम 5 मिनट टहलें। 

खड़े होकर काम करें: यदि संभव हो, तो 'स्टैंडिंग डेस्क' का विकल्प चुनें। 

फाइबर युक्त आहार: अपनी डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें ताकि पाचन तंत्र सक्रिय रहे। 

हाइड्रेशन: पर्याप्त पानी पिएं और प्रोसेस्ड या जंक फूड से दूरी बनाएं।
 


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Ramanjot

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