सावधान महिलाओं! मंडरा रहा है बड़ा खतरा, आने वाले अगले इतने वर्षों तक यह कैंसर मचाएगा तबाही, हो गया भयानक खुलासा

punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 03:19 PM (IST)

Breast Cancer Cases : आधुनिक चिकित्सा और एडवांस टेक्नोलॉजी के दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई सामने आई है। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी की ताजा ग्लोबल स्टडी के मुताबिक अगले 24 वर्षों में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या में 33% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी होने वाली है। रिपोर्ट की मानें तो साल 2050 तक ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली सालाना मौतों का आंकड़ा 10 लाख के करीब पहुंच सकता है।

आंकड़ों का डरावना सच

यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के 'इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन' (IHME) द्वारा किए गए इस अध्ययन में 204 देशों के आंकड़ों को खंगाला गया। 2023 में जहां 23 लाख केस थे 2050 तक इनके 35 लाख पार करने की आशंका है। सालाना मौतों का आंकड़ा 7.64 लाख से बढ़कर 10 लाख होने का अनुमान है।1990 के बाद से भारत में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों में 74% की वृद्धि दर्ज की गई है।

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एशियाई देशों पर मंडराता खतरा

रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर का बोझ अब अमीर देशों से हटकर कम और मध्यम आय वाले देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

  1. लाओस: मौतों में सबसे ज्यादा 214% की बढ़ोतरी।

  2. बांग्लादेश: 91% का इजाफा।

  3. भारत: 74% की बढ़त।

  4. चीन का अपवाद: चीन ने अपनी स्वास्थ्य नीतियों के दम पर मृत्यु दर में 37% की कमी दर्ज की है जो दुनिया के लिए एक मिसाल है।

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युवा महिलाएं निशाने पर

भारत के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि 20 से 54 वर्ष की महिलाओं में नए मामलों में 29% की वृद्धि हुई है। यानी अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही बल्कि युवा आबादी को भी अपनी चपेट में ले रही है। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर की डॉ. मैरी एनजी के अनुसार भारत में केवल 10-15% कैंसर मामलों का ही पंजीकरण हो पाता है जोकि सही रणनीति बनाने में बड़ी बाधा है।

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इन 6 आदतों को बदलें, बच सकती है जान

शोधकर्ताओं का मानना है कि ब्रेस्ट कैंसर के 28% मामले सीधे तौर पर हमारी लाइफस्टाइल से जुड़े हैं। इन 6 रिस्क फैक्टर्स पर काबू पाकर लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं:

  • धूम्रपान (Smoking): कैंसर का सबसे प्रमुख कारण।

  • मोटापा और शुगर: हाई ब्लड शुगर और बढ़ा हुआ वजन जोखिम बढ़ाता है।

  • खराब खान-पान: रेड मीट का अधिक सेवन और जंक फूड से दूरी जरूरी है।

  • शारीरिक सक्रियता: एक्सरसाइज की कमी बीमारी को न्यौता देती है।

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विशेषज्ञों की राय

स्टडी की मुख्य लेखिका केली बंधारी का कहना है कि गरीब देशों में कैंसर का पता बहुत देरी से चलता है और वहां इलाज की गुणवत्ता भी कम है। अगर समय पर जांच (Screening) और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाया जाए तो आने वाले दशकों में करोड़ों 'स्वस्थ जीवन वर्ष' (Healthy Life Years) बचाए जा सकते हैं।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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