सावधान! आपकी थाली में परोसा जा रहा है 'धीमा जहर', नकली खाद्य उत्पादों के जाल में फंस रही है दिल्ली

punjabkesari.in Sunday, Apr 05, 2026 - 11:10 AM (IST)

Fake Food Products Racket Delhi : देश की राजधानी में इन दिनों नकली खाद्य पदार्थों और दैनिक उपयोग के सामानों का काला कारोबार तेजी से जड़ें जमा रहा है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया छापेमारी में ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं जो आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी हैं। जालसाज अब नामी ब्रांडों के नाम पर नकली ईनो, टूथपेस्ट और एक्सपायर हो चुके बिस्कुट-कोल्ड ड्रिंक को दोबारा पैक कर धड़ल्ले से बाजार में बेच रहे हैं।

नकली फैक्ट्री का भंडाफोड़

हाल ही में क्राइम ब्रांच ने बाहरी दिल्ली में चल रही एक ऐसी फैक्ट्री को पकड़ा है जहां नकली सेंसोडाइन (Sensodyne) टूथपेस्ट बनाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से लाखों रुपये का नकली पेस्ट, खाली ट्यूब, पैकिंग मशीनें और कच्चा माल जब्त किया है। आरोपी पिछले 7 महीनों से यह धंधा कर रहा था। नकली पेस्ट की पैकिंग इतनी सटीक थी कि असली और नकली में फर्क करना नामुमकिन था। केवल लैब टेस्ट में ही इसके घटिया और हानिकारक केमिकल का पता चल सका।

सेहत पर धीमा जहर का वार

डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मुताबिक इन नकली उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले घटिया केमिकल्स मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं। इनका इस्तेमाल करने से पेट की गंभीर बीमारियां और इंफेक्शन हो सकता है। त्वचा और मसूड़ों में एलर्जी की समस्या पैदा हो सकती है। लंबे समय तक इस्तेमाल से अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकते हैं।

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जांच की प्रक्रिया: कैसे काम करता है विभाग?

दिल्ली सरकार का खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI नियमों के तहत) नियमित रूप से बाजार से नमूने (Samples) उठाता है। इन नमूनों को सरकारी लैब में भेजा जाता है। नियमों के उल्लंघन, जैसे एक्सपायरी डेट बदलना या मिलावट पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान है। छापेमारी के दौरान अक्सर संबंधित ब्रांड के अधिकारियों को भी बुलाया जाता है ताकि बारीकी से पहचान हो सके।

एक्सपर्ट टिप: असली और नकली की पहचान कैसे करें?

खरीदारी करते समय इन 8 बातों का विशेष ध्यान रखें:

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  1. पैकेजिंग की क्वालिटी: असली उत्पाद की प्रिंटिंग साफ और शार्प होती है। नकली में अक्षर धुंधले या स्पेलिंग गलत हो सकती है।

  2. लोगो (Logo) चेक करें: नकली सामान पर ब्रांड का लोगो अक्सर थोड़ा बदला हुआ या गलत रंग का होता है।

  3. एक्सपायरी डेट की जांच: अगर डेट को खुरचकर बदला गया है या ओवरप्रिंटिंग दिख रही है तो सामान न खरीदें।

  4. FSSAI नंबर: हर खाने के पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर होना जरूरी है। इसे 'Food Safety Connect' ऐप पर वेरिफाई किया जा सकता है।

  5. अजीब गंध या स्वाद: यदि उत्पाद से असामान्य गंध आए या स्वाद बदला हुआ लगे तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।

  6. कीमत का अंतर: अगर कोई ब्रांडेड सामान मार्केट रेट से बहुत ज्यादा सस्ता मिल रहा है तो उसके नकली होने की संभावना अधिक है।

  7. QR कोड: आजकल कंपनियां सुरक्षा के लिए QR कोड देती हैं जिसे स्कैन करके प्रोडक्ट की सत्यता जांची जा सकती है।

  8. ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट: संदिग्ध होने पर कंपनी की वेबसाइट पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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