अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की मौत से हिली दुनिया; विदेशी मीडिया ने पूछा-‘क्या यही India का रणनीतिक साझेदार, क्यो मारे Indians’?

punjabkesari.in Sunday, Jun 14, 2026 - 08:57 PM (IST)

International Desk: ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर MT Setebello पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद केवल भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी अमेरिका और भारत के संबंधों को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। कई प्रमुख विदेशी मीडिया संस्थानों ने सवाल उठाया है कि क्या इस घटना का असर दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी पर पड़ेगा।

 

CNN: ‘यह भारत की जंग नहीं थी, फिर भी ...
अमेरिकी समाचार चैनल CNN ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस हमले ने भारत में व्यापक जनाक्रोश पैदा किया है और पहले से तनावपूर्ण चल रहे भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया विवाद जोड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहाज ओमान सागर से गुजर रहा था और उस पर ईरानी तेल लदा हुआ था। अमेरिकी सेना का दावा है कि चालक दल ने नाकेबंदी लागू कर रहे अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई। CNN ने इस तथ्य पर विशेष जोर दिया कि "यह भारत की लड़ाई नहीं थी, लेकिन जान भारतीयों की गई।" 

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि विभिन्न श्रमिक संगठनों और समुद्री कर्मियों के संगठनों ने भारत सरकार से कड़ी प्रतिक्रिया देने की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ Kanti Bajpai ने CNN से कहा कि यह घटना अमेरिका के साथ पहले से डगमगा रहे संबंधों में एक नई परेशानी बन गई है।  उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारतीय नागरिकों की मौत की और घटनाएं होती हैं तो मोदी सरकार के लिए घरेलू दबाव संभालना मुश्किल हो सकता है।

 

न्यूयॉर्क टाइम्स: भारत अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहता
अमेरिकी अखबार The New York Times ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत की स्थिति बेहद जटिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और ऊर्जा सहयोग को ध्यान में रखते हुए वॉशिंगटन को नाराज करने से बचना चाहता है। दूसरी ओर, भारतीय नागरिकों की मौत को लेकर घरेलू स्तर पर जवाब देने का दबाव भी बढ़ रहा है।  भारतीय नाविकों की बड़ी मौजूदगी न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि वैश्विक मर्चेंट शिपिंग वर्कफोर्स का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है। ऐसे में दुनिया के किसी भी समुद्री संघर्ष का सीधा असर भारतीय नाविकों पर पड़ सकता है।

 

अल जज़ीरा ने उठाया अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल
कतर स्थित मीडिया संस्थान Al Jazeera ने अपनी रिपोर्ट में पूछा कि क्या इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप थी? रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून कन्वेंशन (UNCLOS) के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए उपयोग होने वाले समुद्री मार्गों पर जहाजों को ट्रांजिट का अधिकार प्राप्त है। अल जज़ीरा ने भारतीय समुद्री विशेषज्ञों के हवाले से यह भी लिखा कि गैर-सैन्य और निहत्थे वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना गंभीर कानूनी और नैतिक प्रश्न खड़े करता है।

 

SCMP: रिश्तों के सबसे कठिन दौर में नई चुनौती
हॉन्गकॉन्ग की समाचार वेबसाइट South China Morning Post (SCMP) ने इस घटना को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक कठिन परीक्षा बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग भारत सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और घटना की जांच की जा रही है।  अमेरिकी सांसद Rob Wittman ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए मृत भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। पूर्व अमेरिकी अधिकारी Lisa Curtis ने कहा कि यह घटना ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही टैरिफ, वीजा प्रतिबंधों और अन्य मुद्दों को लेकर तनाव मौजूद है। उनके अनुसार, यह पिछले 25 वर्षों में भारत-अमेरिका संबंधों के सबसे कठिन दौरों में से एक हो सकता है और इससे दोनों देशों के बीच विश्वास पर असर पड़ सकता है।

 

क्या बदलेगा भारत-अमेरिका समीकरण?
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल तीन भारतीय नाविकों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, इंडो-पैसिफिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक समुद्री कानूनों से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और दोनों देशों की कूटनीतिक प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह घटना अस्थायी विवाद साबित होती है या फिर भारत-अमेरिका संबंधों में लंबे समय तक असर छोड़ती है।

 


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Content Writer

Tanuja

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