बिल C-9 के द्वारा कनाडा में खालिस्तानी 'प्लेग्राउंड' का होगा अंत : आरपी सिंह
punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 10:24 PM (IST)
ओटावा/नई दिल्लीः कनाडा सरकार ने कनाडा में खालिस्तानी कट्टरपंथियों के लंबे समय से चले आ रहे "माफी की संस्कृति" को खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बिल C-9 के ज़रिए कनाडा के सिक्योरिटी स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जिसका मकसद उस पूरे सिस्टम को खत्म करना है जिसकी वजह से खालिस्तानी कट्टरपंथियों को आसानी से काम करने का मौका मिला। ये विचार बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने जाहिर किए।
BJP नेता ने कहा कि इस नए कानून के तहत अब 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़े सिंबल या निशान का इस्तेमाल करके नफ़रत या हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किए जाएंगे। पहले ऐसी गतिविधियों को "बोलने की आज़ादी" के नाम पर नज़रअंदाज़ किया जाता था, लेकिन अब यह ढाल हटा दी गई है। बिल C-9 कनाडाई कानून के सेक्शन 319(3)(b) को रद्द करता है, जो पहले धार्मिक ग्रंथों का हवाला देकर हेट स्पीच देने वालों को मुकदमे से छूट देता था। अब कट्टरपंथी धर्म की आड़ में अपने जुर्म नहीं छिपा पाएंगे।
Bill C-9: Reclaiming the Rule of Law and Ending the Khalistani “Playground” in Canada
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) March 27, 2026
The correction in Canada’s security posture is not merely rhetorical it reflects a structural shift in law and governance. Where a culture of impunity once thrived, the current approach seeks… pic.twitter.com/GtDJyMPIiK
मंदिरों की सुरक्षा और तुरंत पुलिस कार्रवाई
RP सिंह ने कहा कि भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों को लंबे समय से मंदिरों और दूसरी कम्युनिटी जगहों के बाहर डराया-धमकाया जाता रहा है। नए कानून के तहत, पूजा की जगहों तक पहुंचने में रुकावट डालना या लोगों को डराना-धमकाना अब एक खास जुर्म माना जाएगा। इसके अलावा, पुलिस को कार्रवाई करने के लिए अब अटॉर्नी जनरल की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, जिससे कानून को लागू करने की प्रक्रिया में तेज़ी आएगी।
ट्रूडो सरकार की पिछली गलतियों पर निशाना
सिंह ने कहा कि जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली पिछली माइनॉरिटी सरकार, जो जगमीत सिंह पर निर्भर थी, ने अपना राजनीतिक वजूद बचाने के लिए नेशनल सिक्योरिटी और फॉरेन पॉलिसी से समझौता किया। इससे भारत के साथ रिश्ते खराब हुए हैं और कनाडा की ग्लोबल साख को नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है। कनाडा ने आतंकवाद को फंडिंग करने के शक में नॉन-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइज़ेशन (NGO) का ऑडिट भी शुरू कर दिया है। यह बदलाव न केवल सुरक्षा के नजरिए से जरूरी है, बल्कि इससे एनर्जी और मिनरल सेक्टर में आर्थिक सहयोग बढ़ने की भी उम्मीद है। कुल मिलाकर, बिल C-9 कनाडा का अपनी पिछली गलतियों को सुधारने और कानून का राज बनाए रखने का एक मजबूत वादा है।
