Gold In India : जानकर चौंक जाएंगे आप... भारत के इस राज्य से निकलता है देश का 99% सोना
punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 05:46 PM (IST)
नेशनल डेस्क : भारत को दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में गिना जाता है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि भारत अपनी जरूरत का सारा सोना विदेशों से मंगाता है, लेकिन हकीकत यह है कि देश की जमीन के नीचे भी सोने का भंडार मौजूद है। फर्क बस इतना है कि भारत में सोने का खनन सीमित स्तर पर होता है और यह प्रक्रिया काफी जटिल है।
अगर मौजूदा समय में सोने के उत्पादन की बात करें तो कर्नाटक देश में सबसे आगे है। भारत में खदानों से निकलने वाले कुल प्राथमिक सोने का लगभग 99% हिस्सा कर्नाटक से ही निकलता है। रायचूर जिले की हुट्टी गोल्ड माइन्स देश की सबसे पुरानी और सक्रिय खदानों में शामिल है। वहीं, कोलार गोल्ड फील्ड्स कभी कर्नाटक की पहचान थी, लेकिन वहां अब उत्पादन बंद हो चुका है।
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हालांकि उत्पादन में कर्नाटक आगे है, लेकिन जमीन के नीचे मौजूद सोने के भंडार के मामले में बिहार शीर्ष पर माना जा रहा है। बिहार के जमुई जिले में बड़े पैमाने पर सोने की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। सरकारी आकलन के अनुसार यहां हजारों टन चट्टानों में सोना छिपा है। फिलहाल यह क्षेत्र सर्वे, तकनीकी तैयारी और आधारभूत विकास के चरण में है, इसलिए यहां व्यावसायिक खनन अभी शुरू नहीं हो पाया है।
भारत में सोना आमतौर पर कठोर चट्टानों के भीतर पाया जाता है। यह नदियों की रेत में आसानी से मिलने वाला सोना नहीं होता, जैसा कुछ देशों में होता है। इसी वजह से भारत में सोने का खनन महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
सोने की माइनिंग की शुरुआत भूवैज्ञानिक सर्वे से होती है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) सैटेलाइट डेटा, ड्रिलिंग और चट्टानों के नमूनों के जरिए यह पता लगाता है कि किस इलाके में सोना मौजूद है। जब किसी क्षेत्र में सोने की पुष्टि हो जाती है, तब वहां खनन की तैयारी शुरू होती है।
देश में अधिकतर सोने की खदानें भूमिगत हैं। जमीन के नीचे सुरंगें बनाकर चट्टानों को नियंत्रित विस्फोट और भारी मशीनों की मदद से तोड़ा जाता है। इसके बाद सोने वाले पत्थर यानी अयस्क को बाहर निकाला जाता है।
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खनन के बाद अयस्क को मशीनों में पीसकर बारीक किया जाता है और फिर रासायनिक प्रक्रिया से सोना अलग किया जाता है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नियंत्रित रसायनों का उपयोग होता है। बाद में इस सोने को रिफाइनरी में भेजा जाता है, जहां इसे शुद्ध कर 99.9 प्रतिशत यानी 24 कैरेट सोना तैयार किया जाता है। यही सोना आगे चलकर सिक्कों, बिस्किट और गहनों के रूप में बाजार तक पहुंचता है।
