Market Experts On Gold: सोना 1.5 लाख पर, चांदी भी उभरी — आगे क्या होने वाला है? निवेशक रह जाएंगे हैरान!

punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 06:55 PM (IST)

नेशनल डेस्क: सराफा बाजार के लिए आज का दिन काफी उथल-पुथल भरा रहा। सुबह के समय बाजार में जो 'फ्लैश क्रैश' (अचानक बड़ी गिरावट) देखने को मिला था, दोपहर होते-होते उसमें सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह कमी कोई स्थाई बदलाव नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा बढ़े हुए बाजार को संतुलित करने की एक प्रक्रिया है।

गिरावट के बाद संभले सोने और चांदी के दाम

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल की डिलीवरी वाला सोना, जो सुबह काफी नीचे चला गया था, अब धीरे-धीरे वापसी कर रहा है और अपने निचले स्तर से काफी ऊपर आ गया है। फिलहाल यह करीब 1,46,221 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, फरवरी की डिलीवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट्स ने तो अपनी सारी गिरावट को पीछे छोड़ दिया है और अब मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।

धड़ाम होने के बाद गोल्ड-सिल्वर ETFs में भी रिकवरी

निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि जो सिल्वर ईटीएफ (ETFs) सुबह 20 प्रतिशत के निचले सर्किट पर थे, उनमें अब करीब 10 प्रतिशत तक का सुधार देखा गया है। इसी तरह गोल्ड ईटीएफ भी, जो सुबह 9 प्रतिशत तक लुढ़क गए थे, अब काफी संभल चुके हैं। हालांकि, अभी भी ज्यादातर ईटीएफ अपनी पुरानी कीमतों के मुकाबले घाटे में ही चल रहे हैं, लेकिन बाजार का रुख सकारात्मक होता दिख रहा है। इसी बीच 'सिल्वर बीस' ईटीएफ में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण निवेशकों को वैकल्पिक एक्सचेंज इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

Long Term के लिए क्यों मजबूत है कीमती धातुएं?

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भले ही इस समय बाजार में अस्थिरता दिख रही हो, लेकिन भविष्य में सोने और चांदी की चमक और बढ़ेगी। इसके पीछे मुख्य वजहें दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही भारी खरीदारी, चांदी की कम होती सप्लाई और वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव हैं। जानकारों के मुताबिक, ये कारण कीमतों को एक मजबूत जमीन प्रदान करते रहेंगे।

बजट के बाद सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में 10% की गिरावट

बजट 2026 में टैक्स नियमों को कड़ा किए जाने के बाद सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमतों में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, अब टैक्स में छूट का फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जिन्होंने सीधे आरबीआई (RBI) से ये बॉन्ड खरीदे हैं और उन्हें मैच्योरिटी तक अपने पास रखेंगे। बाजार से खरीदे गए पुराने बॉन्ड पर नियमों में आए इस बदलाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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