इराक में US एम्बेसी पर ‘सबसे भीषण’ हमला: ड्रोन-रॉकेट से दहला ग्रीन ज़ोन, इरानी स्ट्राइक से बहरीन और UAE भी दहले (VIDEO)
punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 12:43 PM (IST)
International Desk: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन और रॉकेट से हमला किया गया, जिसे अब तक का “सबसे तीव्र हमला” बताया जा रहा है। हमला हाई-सिक्योरिटी ग्रीन ज़ोन में हुआ। लगातार कई ड्रोन और रॉकेट दागे गए। जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला उच्च सुरक्षा वाले ‘ग्रीन ज़ोन’ में हुआ, जहां कई विदेशी मिशन मौजूद हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ड्रोन को इंटरसेप्ट करने की कोशिश की गई। नुकसान सीमित बताया जा रहा है, लेकिन खतरा बड़ा संकेत दे रहा है
WATCH: Explosion as US Embassy in Baghdad, Iraq hit by drone https://t.co/yXSevv5ell pic.twitter.com/Ixb8tEeDfM
— Rapid Report (@RapidReport2025) March 17, 2026
ईरान ने दावा किया है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात के अमेरिकी बेस शामिल हैं। इसी बीच लेबनान में संघर्ष तेज हो रहा है, जहां हिजबुल्ला और इजराइल के बीच झड़पें बढ़ रही हैं। कई पश्चिमी देशों ने तुरंत तनाव कम करने (de-escalation) की अपील की है अमेरिका और यूरोपीय देशों के नेताओं ने कहा कि युद्ध को फैलने से रोकना जरूरी है।कूटनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है। नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
Footage shows the Counter-Rocket, Artillery, and Mortar (C-RAM) system defending the US Embassy in Baghdad as it engages a drone originating from Iranian-linked forces pic.twitter.com/BglqjXtMqE
— Vanguard Intel Group (@vanguardintel) March 16, 2026
लेबनान संकट पर वैश्विक प्रतिक्रिया
उधर लेबनान में बढ़ते संघर्ष को लेकर दुनिया भर के नेताओं की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कीर स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन “विस्तृत युद्ध” में शामिल नहीं होगा। इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने नाराज़गी जताई। ट्रंप ने एक बार फिर NATO सहयोगियों से अपील की कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि अधिक देश इसमें रुचि दिखाएंगे इस पर जर्मनी का साफ रुख रहा। फ्रेडरिक मर्ज ने कहा “यह युद्ध NATO का मामला नहीं है”।
