हॉर्मुज संकट के बीच UAE का ऐतिहासिक फैसलाः 60 साल बाद OPEC से तोड़ा नाता, तेल बाजार में भूचाल

punjabkesari.in Tuesday, Apr 28, 2026 - 06:47 PM (IST)

International Desk: संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए OPEC और OPEC+ से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला 1 मई 2026 से लागू होगा और इसके साथ ही लगभग 60 साल पुरानी सदस्यता खत्म हो जाएगी। यूएई लंबे समय से OPEC के नियमों से असंतुष्ट था। उसे तय सीमा के अंदर ही तेल उत्पादन करना पड़ता था, जबकि उसकी असली क्षमता इससे कहीं ज्यादा है। देश की सरकारी कंपनी ADNOC भविष्य में उत्पादन बढ़ाना चाहती है, लेकिन OPEC के नियम इसमें बाधा बन रहे थे।

 

फैसले का समय महत्वपूर्ण
इस फैसले का समय भी बहुत महत्वपूर्ण है। अभी ईरान युद्ध चल रहा है और Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्ते पर संकट बना हुआ है। इस वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। यूएई और Saudi Arabia के बीच भी पिछले कुछ समय से तनाव बढ़ा है। खासकर यमन से जुड़े मुद्दों और तेल उत्पादन को लेकर दोनों देशों में मतभेद सामने आए हैं। हालांकि अभी तुरंत इसका बहुत बड़ा असर नहीं दिखेगा, क्योंकि होर्मुज संकट के चलते यूएई भी अपनी पूरी क्षमता से तेल निर्यात नहीं कर पा रहा है।  तेल की दुनिया पर UAE के OPEC छोड़ने का असर तुरंत दिखेगा और लंबे समय में और बड़ा हो सकता है।  

 

 तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ेगा
अभी Strait of Hormuz संकट और ईरान युद्ध के कारण सप्लाई पहले से ही प्रभावित है। ऐसे में UAE के बाहर जाने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी, जिससे तेल की कीमतें कभी तेजी से बढ़ेंगी तो कभी गिरेंगी।

 

OPEC की ताकत कमजोर होगी
OPEC दुनिया के तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है। UAE इसका तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था।इसके बाहर जाने से OPEC की पकड़ कमजोर होगी और बाकी देशों के लिए भी बाहर निकलने का रास्ता खुल सकता है।

   
UAE अब OPEC के नियमों से आजाद
UAE अब  ज्यादा तेल उत्पादन कर सकता है। अपनी पूरी क्षमता (4-5 मिलियन बैरल/दिन) तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा हुआ तो भविष्य में तेल की कीमतें नीचे भी आ सकती हैं।

 

तेल बाजार में ‘पावर गेम’ बढ़ेगा
अब Saudi Arabia और रूस जैसे बड़े देश OPEC को संभालने की कोशिश करेंगे, लेकिन UAE के बाहर जाने से संतुलन बिगड़ सकता है। इससे “प्राइस वॉर” (कीमतों की लड़ाई) का खतरा भी बढ़ सकता है।
 


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Content Writer

Tanuja

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