Middle East War: ईरान पर अमेरिका ने किए भीषण हवाई हमले, कई इलाकों में सुनाई दी धमाकों की आवाज

punjabkesari.in Thursday, Jun 11, 2026 - 09:13 AM (IST)

US Air Strikes Tehran Iran : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को बातचीत रोकने के लिए कीमत चुकाने की धमकी दिए जाने के बाद अमेरिका ने आज सुबह तेहरान पर नए सिरे से हवाई हमले किए। ईरान के कई शहरों में हुए इन नए हमलों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की कोशिशें फिर से ठप पड़ती दिखाई दीं। ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और तेल की कीमतों में उछाल आया है। 

ईरान ने हमलों का जवाब देने की धमकी दी है। आज सुबह बहरीन में मिसाइल हमले के सायरन बज उठे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय स्थित है। वहीं कुवैत की सेना ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय होकर गोलाबारी कर रही है। बुधवार को अमेरिका के पहले दौर के हवाई हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर मिसाइलें दागी थीं। 

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने बुधवार रात को ईरान पर जोरदार हमले करने की घोषणा की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान में सूर्योदय से ठीक पहले अपने ताजा हवाई हमलों का दौर पूरा कर लिया। कमांड के अनुसार ये हमले ईरान की अनुचित और लगातार आक्रामकता के जवाब में किए गए और इनमें ईरानी सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों तथा वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। 

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हमलों से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। बताया गया कि ये कार्रवाई अमेरिकी वायुसेना, मरीन कोर और नौसेना ने मिलकर की। इन हमलों के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान, बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के दक्षिणी इलाकों में विस्फोटों की आवाजें गूंजती रहीं। यह इस सप्ताह तीसरी बार था जब दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों ने दो महीने पुराने युद्धविराम की परीक्षा ली। 

ये हमले ऐसे समय हुए जब एक दिन पहले ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमले किए थे जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ट्रंप ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है और इस सप्ताह की शुरुआत में संकेत दिया था कि कुछ ही दिनों में समझौता हो सकता है। 

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यदि अमेरिका समझौता चाहता है तो उसे बल प्रयोग की धमकियों से बचना चाहिए। उन्होंने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, ईरान ने कभी धमकियों और दबाव में बातचीत नहीं की है और न ही भविष्य में दबाव के आगे झुकेगा। इसके बावजूद दोनों देश संघर्ष समाप्त करने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं और इसे अपने-अपने देशों में राजनीतिक जीत के रूप में पेश करना चाहते हैं। 

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भारी बमबारी के बावजूद ईरान ने अपनी मजबूती दिखाई है। उसका मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने की उसकी क्षमता उसे सौदेबाजी करने का रास्ता देती है। यह जलडमरूमध्य तेल और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। 

वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ऐसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के पक्षधर दिखाई देते हैं जिनसे समझौता और कठिन हो सकता है। इनमें ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार का पतन, उसके परमाणु कार्यक्रम का अंत और लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला का विनाश शामिल है। 

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सोमवार को ईरान और इजराइल ने एक-दूसरे पर हमले किए थे। वहीं, अमेरिकी सेना ने बुधवार को कहा कि उसने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एम/टी सेटेबेलो के इंजन कक्ष पर सटीक हथियारों से हमला किया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज ईरानी तेल लेकर नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। 

यह ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई से निष्क्रिय किया गया आठवां व्यापारी जहाज था। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर हमले के बाद तीन भारतीय नाविक लापता हैं जबकि 21 अन्य को बचा लिया गया। मंत्रालय के बयान में अमेरिकी सेना या नाकेबंदी का उल्लेख नहीं किया गया। 

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ईरान ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में दक्षिणी शहर सीरिक के दो जलाशय क्षतिग्रस्त हुए जिससे हजारों लोगों की जलापूर्ति अस्थायी रूप से बाधित हो गई। इस बीच समझौते के प्रयास जारी हैं। अमेरिका से परामर्श के बाद कतर का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को वार्ता के लिए तेहरान पहुंचा। 

एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर यह जानकारी दी। दोनों देशों के बीच यह तनाव अमेरिकी सेना के एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद बढ़ा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गश्त कर रहा था। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर की टक्कर एक ईरानी ड्रोन से हुई थी। 

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हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि टक्कर जानबूझकर कराई गई थी या नहीं। नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित ट्रंप शीघ्र समाधान चाहते हैं। लेकिन उनकी कुछ मांगें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार करना ईरान के लिए कठिन होगा। 

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ दे। ईरान इस यूरेनियम को छोड़ने से इनकार कर रहा है और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। साथ ही वह अंतिम समझौते से पहले ही अपनी कुर्क विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की भी मांग कर रहा है, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया है।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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