अमेरिका ने ईरान पर दागीं मिसाइलें, 13वीं रात भी जारी रहे हवाई हमले, UN ने दी बड़ी चेतावनी

punjabkesari.in Friday, Jul 24, 2026 - 09:37 AM (IST)

Middle East Crisis : समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका की सेना ने बीते दिन ईरान पर लगातार 13वीं रात हवाई हमले किए। ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। इस घटनाक्रम से ईरान से जुड़ा संघर्ष और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है। 

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि केश्म और बंदर अब्बास के आसपास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में विस्फोट हुए जिनमें कथित तौर पर दो लोग घायल हुए। इसके अलावा देश के उत्तर-पश्चिम में अंदीमेश्क, ओमीदियेह और फिरूजाबाद के निकट भी विस्फोट होने की खबर है। 

'यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहा कि नए हमले स्थानीय समयानुसार सुबह करीब पांच बजे से पहले समाप्त हो गए। सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजरने वाले असैन्य नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना था। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है। 

 

वहीं, हूती विद्रोहियों ने एक अन्य महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग को भी बंद करने की धमकी दी। दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले ही ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने के कारण दबाव में है। ईरान और अमेरिका इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर हमले तेज कर चुके हैं। 

 

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हूती विद्रोहियों ने जहाजों पर हमले जारी रखे तो उन्हें बड़े सैन्य दंड का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, यदि वे दोबारा ऐसा करते हैं तो अमेरिका इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा क्योंकि हूती ईरान के समर्थित समूह हैं। ऐसी स्थिति में ईरान और निश्चित रूप से स्वयं हूतियों को भी कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। 

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ट्रंप ने बीते दिन यह भी कहा था कि अमेरिका के कब्जे में मौजूद ईरान की प्रतिबंधित निधियों का इस्तेमाल युद्ध में क्षतिग्रस्त हुई नौकाओं की मरम्मत का खर्च उठाने के लिए किया जाएगा। अमेरिका और ईरान दोनों के साथ करीबी संबंध रखने वाले इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी बीते दिन शांति और वार्ता का आह्वान करने के लिए तेहरान पहुंचे। उनके कार्यालय ने कहा कि उन्होंने आश्वासन दिया है कि इराक की भूमि का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। 

अल-जायदी की इस महीने की शुरुआत में वाशिंगटन में ट्रंप से भी मुलाकात हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह क्षेत्र लगातार बढ़ते टकराव के दुष्चक्र में फंसता जा रहा है जहां एक संकट दूसरे संकट को जन्म दे रहा है और हर बढ़ता तनाव अगले टकराव का कारण बन रहा है। गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। 

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उन्होंने युद्ध समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता संबंधी पाकिस्तान के प्रयासों को और मजबूत किए जाने का आह्वान किया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 27 जून से अमेरिका द्वारा फिर से हवाई हमले शुरू किए जाने के बाद से अब तक 55 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 629 अन्य घायल हो गए हैं। 

ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में पड़ोसी खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों तथा समुद्री जल को शोधित कर पेयजल में बदलने वाले विलवणीकरण संयंत्रों को निशाना बनाया है। ये संयंत्र जल-संकट से जूझ रहे खाड़ी देशों में पेयजल की आपूर्ति का प्रमुख स्रोत हैं। 


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Content Editor

Rohini Oberoi

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