जॉर्डन ने ईरानी मिसाइल हमलों को किया नाकाम; 8 मिसाइलें मार गिराईं, अमेरिका ने भी ईरान पर तेज किए हमले
punjabkesari.in Thursday, Jul 16, 2026 - 06:24 PM (IST)
International Desk: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार तड़के जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई आठ मिसाइलों को सफलतापूर्वक हवा में ही मार गिराया। इस बीच अमेरिका ने भी ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है। जॉर्डन की सेना ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि देश की संप्रभुता, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय की गई थी। मिसाइलों को निर्धारित सैन्य प्रक्रिया के तहत इंटरसेप्ट किया गया। सेना के अनुसार, इस घटना में कोई जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।
जॉर्डन के रॉयल इंजीनियरिंग कॉर्प्स ने अलग-अलग स्थानों पर गिरे मिसाइलों के मलबे को सुरक्षित तरीके से हटाया। सेना ने कहा कि उसकी सभी इकाइयां हाई अलर्ट पर हैं और देश के हवाई क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी खतरे का जवाब तय सैन्य नियमों के अनुसार दिया जाएगा। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ईरान के खिलाफ एक और चरण के हवाई हमले शुरू किए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक इन हमलों का लक्ष्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने या उन्हें धमकी देने के लिए किया जाता है।
अमेरिका ने बताया कि पहले चरण में ग्रेटर टुन्ब द्वीप पर ईरान के तटीय रक्षा ठिकानों, क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्रों और लॉन्च साइट्स पर सटीक हमले किए गए। इसके बाद दूसरे चरण की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। उधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार, जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर हमला कर वहां मौजूद सैन्य ढांचे, लड़ाकू विमानों के शेल्टर और एमक्यू-9 ड्रोन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रहे हमलों के कारण पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी बड़ी चिंता बना हुआ है।
