रूस का नया ''ड्रोन शिकारी'' मैदान मेंः पुतिन की सुरक्षा से युद्धभूमि तक पहुंचा ''योल्का'', लॉन्च होते ही मचाता है तबाही(Video)
punjabkesari.in Monday, Jun 01, 2026 - 01:41 PM (IST)
International Desk: रूस ने आधुनिक युद्ध में तेजी से बढ़ते ड्रोन खतरे का मुकाबला करने के लिए एक नया पोर्टेबल एंटी-ड्रोन सिस्टम "योल्का" (Yolka) तैनात किया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में रूसी सैनिक पिस्तौल जैसी दिखने वाली लॉन्चर डिवाइस से एक छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन को लॉन्च करता दिखाई देता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉन्च होने के बाद यह इंटरसेप्टर ड्रोन स्वतः लक्ष्य की पहचान करता है, उसका पीछा करता है और हवा में ही टक्कर मारकर उसे नष्ट कर देता है।
🚨 Russian special forces reportedly used a handheld kinetic drone interceptor known as the “Yolka” (“New Year Tree”) to take down a Ukrainian attack drone headed toward Donetsk.
— Camguarda 🔥 Unfiltered | Art & News (@Camguarda) May 30, 2026
The device appears designed to physically intercept and disable drones mid-flight — highlighting how… pic.twitter.com/sit7FMxglz
विक्ट्री डे पर पहली बार दिखा था सिस्टम
यह सिस्टम पहली बार मई 2025 में रूस के विक्ट्री डे परेड के दौरान चर्चा में आया था, जब राष्ट्रपति Vladimir Putin के पास तैनात एक सुरक्षा अधिकारी के हाथ में यह कॉम्पैक्ट डिवाइस दिखाई दी थी। बाद में अधिकारियों ने इसकी पहचान "योल्का" एंटी-ड्रोन सिस्टम के रूप में की।
कैसे काम करता है योल्का?
योल्का एक छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन को गन जैसी लॉन्चर से छोड़ता है। यह ड्रोन आसमान में जाकर दुश्मन ड्रोन की तलाश करता है और उसे ट्रैक करते हुए पीछा करता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई विस्फोटक वारहेड नहीं होता। यह दुश्मन ड्रोन से तेज रफ्तार में सीधी टक्कर मारकर उसे गिरा देता है। बताया जा रहा है कि इसमें कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगे हैं, जो लॉन्च के बाद इसे स्वायत्त रूप से लक्ष्य तक पहुंचाते हैं।
Footage shows a group of Ukrainian border guards engaging an incoming Russian Shahed drone at extremely close range, using concentrated small arms fire to bring it down 🇺🇦🇷🇺 pic.twitter.com/BXlRk3n7b5
— WAR (@warsurv) June 1, 2026
क्या हैं इसकी क्षमताएं?
- रेंज: लगभग 3 किलोमीटर
- गति: 200 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा
- वजन: हल्का और पोर्टेबल
- अनुमानित लागत: लगभग 500 अमेरिकी डॉलर प्रति इंटरसेप्टर
यूक्रेन युद्ध से मिली सीख
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने दिखाया है कि छोटे निगरानी ड्रोन और एफपीवी (FPV) कामिकाज़े ड्रोन युद्ध के स्वरूप को बदल रहे हैं। ऐसे में योल्का जैसे सिस्टम सैनिकों को अग्रिम मोर्चे पर कम लागत में तत्काल ड्रोन सुरक्षा उपलब्ध करा सकते हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रणाली दावों के अनुरूप प्रदर्शन करती है, तो भविष्य में एंटी-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।
