नेपाल की बाढ़ छोड़ गई गहरे जख्म: रात में चीखकर उठ रहे बच्चे, मानसिक आघात से जूझ रहे हजारों पीड़ित(Video)

punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 12:34 PM (IST)

Kathmandu: नेपाल में बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन तबाही का खौफ अभी लोगों के दिलों से नहीं उतरा है। बच्चे रात में डरकर नींद से जाग जाते हैं और रोते हुए कहते हैं कि फिर बाढ़ आई है। कई वयस्क डर और बेचैनी से जूझ रहे हैं, जबकि उफनती नदियों और बाढ़ के पानी के बीच अपनों से बिछड़े परिवार अपने प्रियजनों की बेसब्री से तलाश कर रहे हैं। विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में तबाही के साथ-साथ ऐसा गहरा मानसिक आघात भी छोड़ा है, जिसकी भयावह तस्वीर अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। पिछले एक दशक में आई इस सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहे नेपाल में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब उस त्रासदी के शुरुआती संकेत देख रहे हैं, जो आसपास हुई भौतिक तबाही की तुलना में कम दिखाई देती है।

 

बाढ़ में मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच चुकी है और करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में अपनों को खोने, घर-बार छोड़ने और भविष्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता का मानसिक बोझ हजारों लोगों पर बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कवायद शुरू की है। 'द काठमांडू पोस्ट' ने मंगलवार को अधिकारियों के हवाले से बताया कि आपदा के मानसिक प्रभाव से निपटने के लिए सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 50 मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों और मनोसामाजिक परामर्शदाताओं को तैनात किया है। इसके अलावा बागमती प्रांत में 64 प्रशिक्षित परामर्शदाता जरूरत पड़ने पर तत्काल सेवा देने के लिए तैयार रखे गए हैं। स्वास्थ्य सेवा विभाग की वरिष्ठ सलाहकार और चिकित्सा विशेषज्ञ पोमावती थापा ने बताया कि रसुवा और नुवाकोट में तैनात 50 मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों में से करीब 10 सीधे तौर पर मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार दे रहे हैं।

 

वहीं, सड़क संपर्क से कटे रसुवा के दूरदराज इलाके उत्तरगया में चार सदस्यों की एक टीम भेजी गई है। उन्होंने बताया कि विभाग ने मानसिक स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की योजना तैयार की है और उन इलाकों में उनकी सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर समन्वय किया जा रहा है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।  इस अभियान में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी, मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसिलिंग केंद्र नेपाल और कई अन्य गैर-सरकारी संगठन भी सहयोग कर रहे हैं। सरकार ने फोन के जरिए मनोसामाजिक सहायता की सुविधा भी बढ़ाई है। स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा मंत्रालय के उप प्रवक्ता समीर कुमार अधिकारी ने बताया कि 1115 हेल्पलाइन पर सामान्य स्वास्थ्य संबंधी परामर्श और समन्वय की सुविधा उपलब्ध है।  वहीं, 1166 के जरिए विशेष मनोसामाजिक सेवा उपलब्ध है, जिसे पाटन मानसिक अस्पताल से संचालित किया जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक, देश के किसी भी हिस्से से आने वाले फोन को इस सेवा से जोड़ा जाता है और फिर मनोसामाजिक परामर्शदाताओं तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल सात परामर्शदाता बारी-बारी से चौबीसों घंटे सेवा दे रहे हैं। मंत्रालय 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध करा रहा है।

 

नुवाकोट के बिदुर में मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसिलिंग केंद्र नेपाल की चार सदस्यीय मनोसामाजिक टीम के साथ काम कर रहे मनोवैज्ञानिक गोपाल बोहरा ने बताया कि आपदा में बचे हुए लोगों में सदमे और मानसिक तनाव के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। बोहरा ने कहा, ''इनमें से ज्यादातर लोग अभी सदमे में हैं और अपनी परेशानियों को शब्दों में बयान तक नहीं कर पा रहे हैं।'' उन्होंने बताया कि राहत केंद्र में रह रहे दो बच्चे रात में बार-बार डरकर जाग जाते हैं। उन्हें बाढ़ आने के डरावने सपने आते हैं और वे रोते हुए कहते हैं कि बाढ़ फिर लौट आई है। बोहरा के अनुसार, कई वयस्कों में बेचैनी, लगातार डर और अचानक तेज आवाज या हलचल पर जरूरत से ज्यादा चौंक जाने जैसी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। फिलहाल मानसिक स्वास्थ्य कर्मियों का काफी समय बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाने, पीड़ितों को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने तथा उन्हें आश्रय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में जा रहा है।  


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Content Writer

Tanuja

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