नेपाल बाढ़ में अपनों की तलाश बनी बड़ी चुनौती; शव नंबर 1003 को लेकर घमासान, तीन परिवारों ने किया दावा
punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 04:59 PM (IST)
Kathmandu: नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसका अंत अब भी दिखाई नहीं दे रहा। कोई अपने लापता बेटे को ढूंढ रहा है, कोई भाई की तलाश में अस्पतालों के चक्कर काट रहा है और कई परिवार बरामद शवों की तस्वीरों में अपने प्रियजनों के चेहरे तलाश रहे हैं। इसी दर्दनाक स्थिति के बीच पोखरा के एक सरकारी अस्पताल में रखे शव नंबर 1003 की पहचान को लेकर ऐसी उलझन सामने आई है, जिसमें तीन परिवारों ने दावा किया कि शव उनके लापता परिजन का है। अब इस विवाद का फैसला DNA जांच से होगा। शव नंबर 1003 को लेकर एक परिवार ने दावा किया कि यह बर्दिया के जलविद्युत परियोजना कर्मी गोपाल दहित का शव है। दूसरे परिवार का कहना है कि शव उनके लापता परिजन रूपनदेही के पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल का है।
रविवार को एक तीसरे परिवार ने भी शव पर दावा किया था, हालांकि बाद में उसने अपना दावा वापस ले लिया। अब गोपाल दहित और दामोदर बस्याल के परिवारों के बीच पहचान को लेकर विवाद बना हुआ है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि अंतिम फैसला DNA जांच से ही होना चाहिए। बाढ़ के बाद दूर-दराज के इलाकों में बहकर पहुंचे शवों को अलग-अलग अस्पतालों में लाया जा रहा है। परिजन अस्पतालों में पहुंचकर अज्ञात शवों की तस्वीरें देखते हैं और बेहद बारीकी से पहचान करने की कोशिश करते हैं। वे चेहरे की बनावट, शरीर की संरचना, दांत, कान, होंठ, माथे, हाथ और शरीर पर मौजूद खास निशानों को देखते हैं। कई बार मृतक के पास मिली निजी वस्तुएं भी पहचान का सबसे बड़ा सहारा बन रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पहचान से जुड़ी जानकारी और DNA नमूने सुरक्षित रखने के बाद 199 अज्ञात शवों को दफना दिया गया। अब इन शवों की पहचान के लिए सुरक्षित DNA रिकॉर्ड और परिजनों के नमूनों का मिलान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
102 शव पोखरा लाए गए
रिपोर्ट के अनुसार, गोरखा, तनहूं, धादिंग और नवलपरासी पूर्व जिलों से मिले 102 शव पोखरा लाए गए हैं। सोमवार तक इनमें से 16 शवों की पहचान हो चुकी थी और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया था। वहीं, 87 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका था। पहचान को लेकर विवाद वाले पांच मामलों में पुलिस ने संबंधित परिजनों के DNA नमूने भी लिए हैं। गोपाल दहित जलविद्युत परियोजना में काम करने के लिए रसुवा गए थे और बाढ़ के बाद लापता हो गए। उनकी बहन मांजी थारू और परिवार के दूसरे सदस्य बर्दिया से गैंडाकोट पहुंचे। वहां उन्हें बरामद शवों की तस्वीरें दिखाई गईं। परिवार ने शव नंबर 1003 को गोपाल के रूप में पहचाना और उसे घर ले जाने के लिए पोखरा पहुंच गया। परिवार का कहना था कि शव के दांत, माथे, होंठ, हाथ, छाती और चेहरे की बनावट गोपाल की शारीरिक विशेषताओं से मेल खाती है। लेकिन तभी दामोदर बस्याल के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए और उन्होंने भी इसी शव को अपने परिवार के सदस्य का बताया।उनका कहना था कि शव की कई शारीरिक विशेषताएं उनके लापता परिजन से मेल खाती हैं। अब दोनों परिवार DNA जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
DNA रिपोर्ट में लग सकता डेढ़ महीना
नेपाल पुलिस ने शवों के DNA नमूने एकत्र कर लिए हैं। लेकिन बड़ी संख्या में नमूनों की जांच के कारण परिणाम आने में एक से डेढ़ महीने तक का समय लग सकता है। इन नमूनों की जांच नेपाल पुलिस की प्रयोगशाला और नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की प्रयोगशाला में की जा रही है। यानी कई परिवारों के लिए अपनों को अंतिम बार घर ले जाने का इंतजार अभी और लंबा हो सकता है।
पांच साल के प्रिंस की टाई बनी पहचान
नेपाल में पहचान की एक और मार्मिक कहानी सामने आई है। नुवाकोट के बिदुर निवासी राज कुमार तामांग ने नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर बरामद शवों की तस्वीरें देखीं और अपने पांच वर्षीय बेटे प्रिंस की पहचान की। प्रिंस स्कूल की वर्दी पहनकर घर से निकला था और त्रिशूली नदी में बाढ़ आने के बाद लापता हो गया। उसका शव काफी दूर नवलपरासी जिले में नारायणी नदी से बरामद हुआ। परिजन ने उसकी पहचान उसके स्कूल की टाई, गले के हार और कान की बाली से की। उसकी टाई पर बिदुर के उत्तरगया माध्यमिक विद्यालय का नाम भी लिखा था, जहां वह KG का छात्र था।
भाई की पहचान टैटू से
भक्तपुर के सत्य कृष्ण प्रजापति ने अपने बड़े भाई सत्य सुंदर प्रजापति की पहचान उनके कंधे पर बने टैटू से की। सत्य सुंदर रसुवा में निर्माणाधीन अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में साइट इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे। उनके अवशेष शुक्रवार को काठमांडू ले जाए गए। ये मामले बताते हैं कि जब चेहरा पहचानने लायक नहीं रहता, तब कपड़े, आभूषण, टैटू या शरीर के किसी खास निशान के जरिए परिवार अपने प्रियजनों को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ के पानी में लंबे समय तक पड़े रहने के कारण कई शव बुरी तरह सड़ चुके हैं या क्षत-विक्षत हो गए हैं। इस वजह से परिजनों और अधिकारियों के लिए उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया है। काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में सोमवार तक 94 शव लाए गए थे। इनमें से केवल 9 की पहचान हो सकी और उन्हें परिजनों को सौंपा गया। वहीं, चितवन जिले में 272 शव बरामद किए गए थे, लेकिन रेडियो नेपाल की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से केवल 12 की पहचान हो पाई थी।
