नेपाल बाढ़ में चीनी सुपरवाइजर की शर्मनाक करतूत, टनल में फंसे सैंकड़ों मजदूरों ने मांगी मदद तो छोड़कर भाग गया

punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 04:07 PM (IST)

Kathmandu: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों को लेकर कई गंभीर दावे सामने आ रहे हैं। त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर स्टेशन में काम करने वाले एक सर्वाइवर ने आरोप लगाया है कि बाढ़ आने के दौरान एक चीनी सुपरवाइजर मजदूरों को सुरंग से बाहर निकालने में मदद करने के बजाय खुद वहां से निकल गया।सर्वाइवर राज छेत्री के मुताबिक, जिस समय सुरंग में अचानक पानी, कीचड़ और मलबा घुसने लगा, उस समय मजदूरों ने चीनी सुपरवाइजर से उन्हें बाहर निकलने की अनुमति देने और मदद करने की गुहार लगाई थी। राज छेत्री ने दावा किया कि वह अन्य मजदूरों के साथ टनल नंबर-3 में मौजूद थे। अचानक उन्हें तेज आवाज सुनाई दी और खतरे का एहसास हुआ। उन्होंने बताया कि उन्होंने चीनी सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर जाने की अनुमति मांगी। उनके मुताबिक, सुपरवाइजर ने कहा कि वह जाकर देखता है, लेकिन इसके बाद वह खुद ही सुरंग से बाहर निकल गया।

 

छेत्री के आरोप के मुताबिक, मजदूरों को वहीं छोड़ दिया गया और देखते ही देखते सुरंग में पानी और मलबा भरने लगा। हालांकि, सुपरवाइजर के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। छेत्री ने दावा किया कि जब बाढ़ आई, उस समय टनल नंबर-3 में करीब 265 लोग काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पानी और मलबे के तेज बहाव ने मजदूरों, वाहनों और उनके सामान को अपनी चपेट में ले लिया। छेत्री के मुताबिक, वह सुरंग के मुहाने की तरफ भागे और किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।उन्होंने बताया कि चार लोग वहां से भागने में सफल हुए, लेकिन उनमें से दो अभी भी लापता हैं। छेत्री ने सुरंग के अंदर का मंजर बेहद भयावह बताया। उनके मुताबिक, वहां कई मजदूरों के शव पड़े थे और कुछ लोग अभी भी जिंदा हो सकते थे। उन्होंने दावा किया कि मलबे के बीच से 'बचाओ-बचाओ' की आवाजें सुनाई दे रही थीं। उनके मुताबिक, उस समय हर किसी के सामने अपनी जान बचाने की चुनौती थी। एक तरफ साथी मजदूरों को बचाने की कोशिश थी और दूसरी तरफ बढ़ता हुआ पानी और मलबा जान लेने पर तुला था।

 

 सुरंग से निकलने के बाद भी छेत्री और अन्य बचे लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि वे शुरुआती कुछ दिनों तक जंगल में रहे और एक पेड़ के नीचे सोकर रात बिताई। उनके पास मोबाइल फोन नहीं थे और इलाके में मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं कर रहा था। इस वजह से वे अपने परिवारों को यह तक नहीं बता पा रहे थे कि वे जिंदा हैं।  छेत्री के मुताबिक, नेटवर्क बहाल होने के बाद ही वह अपने परिवार से संपर्क कर सके। सर्वाइवर ने चीन पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की पहले से जानकारी थी। छेत्री ने कहा कि अगर मजदूरों को समय रहते खतरे की जानकारी दे दी जाती तो कई लोगों की जान और संपत्ति बचाई जा सकती थी। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आपदा के कारणों और समय रहते चेतावनी की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों की जांच अहम होगी। त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर परियोजना में अभी भी कई लोगों के लापता होने की खबर है। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 40 लोग त्रिशूली-3ए से अब भी लापता हैं, जबकि बाढ़ से प्रभावित विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं में 900 से अधिक मजदूरों के लापता होने की बात कही गई है।

 

सुरंगों में कीचड़ और मलबा भर जाने के कारण बचाव अभियान बेहद मुश्किल हो गया है। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और भूमिगत सुरंगों तक पहुंच की कठिनाई ने रेस्क्यू टीमों की चुनौती और बढ़ा दी है। लापता मजदूरों के परिवार अब बचाव अभियान की गति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कुछ परिजनों का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद उन्हें अपने रिश्तेदारों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। एक लापता इंजीनियर की पत्नी ने दावा किया कि छह दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें किसी ठोस रेस्क्यू प्रगति की जानकारी नहीं मिली। परिवार जानकारी के लिए सरकारी दफ्तरों से लेकर सेना मुख्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा नीचे की ओर आया। इससे सड़क, पुल, बस्तियों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ। पुलिस के मुताबिक, नेपाल में अब तक 1,126 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। पड़ोसी तिब्बत में चीनी अधिकारियों ने 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। 


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Content Writer

Tanuja