PM बालेन ने नेपाल विनाश का दुनिया पर फोड़ा ठीकरा; जानें क्यों ठहराया जिम्मेदार ? मृतकों का आंकड़ा 1250 के पार
punjabkesari.in Thursday, Sep 03, 2026 - 12:47 PM (IST)
Kathmandu: नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 1,252 हो गई, क्योंकि प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए गए, जबकि आपदा के एक हफ़्ते से ज़्यादा समय बीतने के बाद भी हज़ारों लोग लापता हैं। यह जानकारी पुलिस ने दी। उधर, प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया के सामने बड़ा सवाल खड़ा किया है। संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस आपदा ने साफ कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग जलवायु परिवर्तन का कितना भयावह खामियाजा भुगत रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए योगदान वैश्विक स्तर पर हुआ है, इसलिए इसके विनाशकारी प्रभावों को संभालने और कम करने की जिम्मेदारी भी पूरी वैश्विक बिरादरी की है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने के बाद भोटेकोशी नदी में तेज जलप्रवाह आया, जिसने रसुवा समेत उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार, इस भीषण आपदा में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,800 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने केवल लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि घरों, सड़कों, पुलों, बस्तियों और महत्वपूर्ण ढांचों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, लेकिन यह आपदा वास्तव में पूरे नेपाल के लिए एक गहरा राष्ट्रीय घाव बन गई है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ तीन जिलों की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे देश के दिल पर लगा बड़ा आघात है।”
संसद में भावुक लेकिन दृढ़ संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में देश के नेतृत्व का काम लोगों के बीच निराशा फैलाना नहीं, बल्कि हिम्मत, सहारा और भरोसा पैदा करना है। उन्होंने कहा कि नेपाल के सामने मुश्किल हालात जरूर हैं, लेकिन देश के पास मजबूत इरादों और साहस के साथ लड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल इस चुनौती से पीछे हटने वाला नहीं है और सरकार बचाव तथा राहत अभियान को पूरी ताकत से आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने उन खबरों को भी स्पष्ट किया, जिनमें कहा गया था कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने से इनकार कर दिया है।उन्होंने साफ कहा कि इतने बड़े संकट में अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। नेपाल सरकार शुरू से ही दुनिया के विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ राहत और बचाव सहायता के लिए तालमेल कर रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, अब तक कई मित्र देशों ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री ने संसद को बताया कि भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कतर, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जापान और सिंगापुर जैसे देशों ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए सहायता उपलब्ध कराई है। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी नेपाल की मदद करने का भरोसा दिया है। एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि बुधवार दोपहर तक प्रधानमंत्री राहत कोष में 7 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी थी।यह राशि राहत, बचाव और बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार के सामने अब केवल लोगों को बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि हजारों प्रभावित परिवारों को दोबारा बसाने और तबाह हुए इलाकों का पुनर्निर्माण भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।
