YouTube से पीएम हाउस तक का सफर, जानिए नेपाल के सबसे कम उम्र के PM बालेंद्र शाह के बारे में
punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 03:05 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: नेपाल की राजनीति में शुक्रवार को एक नया इतिहास रचा गया। 35 वर्षीय युवा नेता बालेंद्र शाह,को वहां के लोगों ने पीएम के तौर पर चुना है। बालेन की यह जीत न केवल एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, बल्कि नेपाल की पारंपरिक पार्टियों के वर्चस्व के अंत की शुरुआत भी मानी जा रही है।
इस दिग्गज नेता को दी करारी हार
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में बड़ा उलटफेर करते हुए नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और CPN-UML के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को पटखनी दी। बालेन ने करीब 50,000 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है।
मधेश क्षेत्र से निकलने वाले पहले 'कार्यकारी प्रमुख'
बालेन शाह नेपाल के इतिहास में पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो मधेश क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं और देश के शीर्ष कार्यकारी पद (प्रधानमंत्री) तक पहुंचे हैं। इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि रखने वाले बालेंद्र ने कर्नाटक (भारत) के विश्वेश्वरैया तकनीकी विश्वविद्यालय से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया है।

हिप हॉप स्टार भी रह चुके हैं बालेंद्र शाह
अपने राजनीतिक करियर से पहले ही बालेंद्र शाह एक नेपाली हिप- हॉप स्टार के तौर पर फेमस हैं। साल 2013 में उन्होंने YouTube सीरीज रॉ बार्ज से फेम हासिल की। बालेंद्र अपने गाने में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बेरोजगारी के मुद्दे उठाए हैं, जिसके चलते लोगों ने इन गानों को काफी पसंद किया है। सबसे पहले साल 2012 में उन्होंने पहला गाना स्ट्रीट चाइल्ड निकाला, जिसमें देशभर में इस गाने को लेकर धूम मची।
आंदोलन से सत्ता के शिखर तक
पिछले साल सितंबर में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हुए Gen Z युवाओं के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ओली सरकार गिर गई थी। उस समय भी बालेन अंतरिम सरकार के लिए पहली पसंद थे, लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव जीतकर आने का रास्ता चुना। जनवरी में वे रवि लामिछाने की पार्टी RSP में शामिल हुए और पार्टी का चेहरा बने।
काठमांडू के मेयर के रूप में शानदार ट्रैक रिकॉर्ड
2022 में निर्दलीय मेयर के रूप में बालेन ने काठमांडू की सूरत बदल दी थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ प्रमुथ उपलब्धियां हासिल कीं। इनमें अवैध निर्माणों को हटाकर शहर को साफ-सुथरा बनाना,स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू करना और गरीबों के लिए अस्पतालों में मुफ्त बेड आरक्षित करना शामिल है। इसके अलावा उनके नेतृत्व में करीब 70,000 युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिले।
विवादों से भी रहा नाता
बालेन का सफर पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहा। काठमांडू में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ (डिमोलिशन) और प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर दमकल गाड़ियां न भेजने के आरोपों के कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा।
चुनावी रैलियों में सिग्नेचर स्टाइल में आए नजर
चुनावी रैलियों में बालेन अपने सिग्नेचर स्टाइल काले चश्मे और काली ब्लेज़र में नजर आते थे। उनके हाथ में अक्सर एक छोटी धातु की घंटी (RSP का चुनाव चिह्न) होती थी, जिसे बजाकर वे विरोधियों को बदलाव की चेतावनी देते थे। उन्होंने अपने घोषणापत्र में '100 सूत्रीय प्रतिबद्धता' के जरिए सरकारी सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने और नौकरशाही को राजनीति से मुक्त करने का वादा किया है।

