PM मोदी ने कतर के अमीर को लगाया फोन, ईद की बधाई देकर जंग के हालातों पर भी की बात
punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 06:23 AM (IST)
नेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना हुए हमलों की कड़ी निंदा की और शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ फोन पर बातचीत के दौरान कतर के प्रति भारत की एकजुटता दोहराई।
Spoke with my brother, H.H. Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani, the Amir of Qatar, and conveyed warm Eid greetings to him and the people of Qatar.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 19, 2026
Reiterated that we stand in solidarity with Qatar and strongly condemn the attacks on the region’s energy infrastructure.
Expressed…
मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर मोदी ने कहा, 'हम कतर के साथ एकजुटता से खड़े हैं और इस क्षेत्र के ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हैंष' इस तरह उन्होंने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच महत्वपूर्ण ऊर्जा संपत्तियों के लिए खतरों के खिलाफ भारत का रुख मजबूती से रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने कतर के नेतृत्व और वहां की जनता को ईद की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
उन्होंने कहा, 'मैंने अपने भाई कतर के अमीर, महामहिम शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात की और उन्हें तथा कतर की जनता को ईद की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।' प्रधानमंत्री की ओर से ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब मध्य पूर्व में ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं; यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयात पर अत्यधिक निर्भर भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है।
मोदी ने कतर द्वारा भारतीय समुदाय को दिए जा रहे निरंतर समर्थन की सराहना भी की। उन्होंने कहा, 'भारतीय समुदाय को दी जा रही देखभाल और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।' समुद्री सुरक्षा पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि भारत 'होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित और मुक्त आवागमन' का समर्थन करता है।
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्ग है जिससे होकर दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहेगी। इस तरह उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच भारत व्यापक कूटनीतिक रुख को दोहराया।
