ईरान में शांति समझौते पर बगावतः कट्टरपंथी बने सबसे बड़ा रोड़ा, बोले- नहीं होने देंगे अमेरिका के साथ डील
punjabkesari.in Sunday, May 31, 2026 - 11:36 AM (IST)
International Desk: अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) और क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट (CTP) की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी गुट अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं में किसी भी महत्वपूर्ण रियायत के खिलाफ हैं। रिपोर्ट के अनुसार, विशेष रूप से IRGC के प्रमुख नेता अहमद वहीदी और उनका करीबी समूह समझौते के लिए झुकने को तैयार नहीं दिख रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले समुद्री यातायात का प्रबंधन IRGC के नियंत्रण में रहना चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस व्यवस्था को स्वीकार करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है।
ISW-CTP के अनुसार, ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर कई धड़े मौजूद हैं, लेकिन अहमद वहीदी और उनके समर्थक अमेरिका के साथ बातचीत में किसी भी प्रकार की "अर्थपूर्ण रियायत" देने के पक्ष में नहीं हैं। उनका रुख विशेष रूप से दो मुद्दों होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी प्रकार की नई पाबंदी पर बेहद कठोर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ व्यावहारिक नेता बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लेने वाले प्रभावशाली हलकों में अभी भी कट्टरपंथियों का प्रभाव मजबूत बना हुआ है।इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने हाल ही में संकेत दिया है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प अभी भी मेज पर है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता ऐसा समझौता करना है जो यह सुनिश्चित करे कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह सैन्य टकराव की बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देंगे।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में सभी नेता एक जैसी सोच नहीं रखते। संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और कुछ अन्य नेताओं को अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना जाता है, जबकि कट्टरपंथी गुट अमेरिका पर दबाव बनाए रखने और अधिकतम शर्तों पर अड़े रहने की रणनीति अपना रहा है। बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी असर डाल सकता है।
